अगले खरीफ सीजन से दलहन-तिलहन की खरीद के लिए बायो मैट्रिक स्क्रीनिंग होगा आवश्यक
12-May-2025 03:29 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के खरीफ मार्केटिंग सीजन से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दलहनों एवं तिलहन की खरीद के लिए बायो मैट्रिक फेस ऑथेंटिकेशन तथा प्वाइंट ऑफ सेल मशीन का उपयोग अनिवार्य बनाने का निर्णय लिया है जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक किसानों को ही विभिन्न योजनाओं के तहत खरीद का लाभ हासिल हो सके।
आधार अधिनियम 2016 के खंड 37 का उपयोग करते हुए यह नियम लागू किया गया है जो 21 अप्रैल 2025 से प्रभावी हो चुका है। इसके अंतर्गत सरकारी क्रय केन्द्रों (प्वाइंट ऑफ सेल) पर किसानों की बायो मैट्रिक स्क्रीनिंग की जाएगी और फिर उसका सत्यापन किया जाएगा। उसके बाद ही दलहन-तिलहन की खरीद होगी।
इस वर्ष खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान सरकार को किसानों से रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन तथा मूंगफली की खरीद करनी पड़ी। इसके अलावा मूंग की भी अच्छी खरीद हुई।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस नए नियम के साथ केवल नए उत्पाद एवं वास्तविक किसान ही खरीद प्रक्रिया के अंग होंगे। केन्द्रीय एजेंसी- नैफेड तथा एनसीसीएफ तथा कुछ प्रांतीय वैधानिक एजेंसियों द्वारा ही एमएसपी पर किसानों से दलहनों एवं तिलहनों की खरीद की जाती है। फिलहाल खरीफ कालीन तुवर तथा रबी कालीन चना एवं मसूर के साथ-साथ सरसों की भी सरकारी खरीद हो रही है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में केवल चावल (धान) एवं गेहूं की खरीद के लिए ही प्वाइंट ऑफ सेल मशीन का उपयोग किया जा रहा है जबकि अगले खरीफ सीजन से दलहन और तिलहन की खरीद के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार चाहती है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर केवल पंजीकृत किसानों से दलहन-तिलहन की खरीद की जाए ताकि वास्तविक उत्पादकों को उसका फायदा सुनिश्चित हो सके।
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान सहित मूल्य समर्थन योजना एवं मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) आदि के तहत किसानों से दलहन-तिलहन की खरीद होती है।
केन्द्र सरकार ने दलहन-तिलहन की खरीद की समय सीमा भी तीन माह (90 दिन) से घटाकर दो माह (60 दिन) नियत करने का निर्णय लिया है जबकि आवश्यकता पड़ने पर इसमें एक माह या 30 दिनों की बढ़ोत्तरी की जा सकती है। इससे किसानों को जल्दी-जल्दी अपना उत्पाद बेचना पड़ेगा।
