अगले साल खाद्य महंगाई में सीमित उतार-चढ़ाव का अनुमान

29-Dec-2025 08:13 PM

नई दिल्ली। भारत में वर्ष 2025 के अंतिम महीनों के दौरान खाद्य महंगाई में गिरावट दर्ज की गई लेकिन वर्ष 2026 में इसमें सीमित उतार-चढ़ाव आने का अनुमान लगाया जा रहा है। 2025-26 के सीजन में चावल और गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद है और सरकार के पास इसका पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। रबी कालीन फसलों की अच्छी बिजाई हुई है और उसकी हालत संतोषजनक बताई जा रही है। इससे अनाज तथा दाल-दलहन का घरेलू बाजार भाव काफी हद तक स्थिर रहने की उम्मीद है। 

उल्लेखनीय है कि खाद्य महंगाई की दर अक्टूबर 2024 में उछलकर दो अंकों में पहुंच गई थी लेकिन उसके बाद विभिन्न खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट आने लगी और खुदरा खाद्य महंगाई दर घटकर पिछले छह महीनों से मायनस में बनी हुई है। कुछ जिंसों का घरेलू उत्पादन शानदार होने तथा कुछ उत्पादों का विदेशों से भारी आयात होने से कस्टम घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति-उपलब्धता की स्थिति काफी सुगम हो गई और कीमतों में नरमी आ गई। 

रबी फसलों की अच्छी स्थिति एवं ऊंचे सरकारी स्टॉक को देखते हुए वर्ष 2026 में खाद्य महंगाई दर में सीमित बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2024 में खाद्य महंगाई की दर काफी ऊंची हो गई थी जो वर्ष 2025 में नीचे आ गई। वर्ष 2026 में इसमें सामान्य उतार-चढ़ाव आने के आसार हैं।  

अगले साल की पहली छमाही (जनवरी- जून 2026) के दौरान खाद्य महंगाई की दर में बहुत बढ़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है लेकिन दूसरी छमाही की महंगाई दर दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति से निर्धारित हो सकती है।

वैश्विक स्तर पर ला नीना मौसम चक्र की सक्रियता फरवरी 2026 में समाप्त होने का अनुमान लगाया जा रहा है और यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून किसी कारण वश प्रभावित हुआ तब वर्ष के अंत तक अनेक कृषि उत्पादों के दाम में तेजी-मजबूती का माहौल बन सकता है। वैसे रबी फसलों की हालत अच्छी है और मांग-आपूर्ति का समीकरण भी संतुलित दिखाई पड़ रहा है।  

अक्टूबर 2024 में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 10.87 प्रतिशत की ऊंचाई पर पहुंच गया था जो नियमित रूप से घटते हुए नवम्बर 2025 में (-) 3.9 प्रतिशत रह गया। इसके तहत अनाज, दाल, सब्जी एवं मसाला आदि की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।