अगले साल थाईलैंड से चावल के निर्यात में भारी गिरावट आने की आशंका
26-Dec-2025 05:05 PM
बैंकॉक। यद्यपि दक्षिण-पूर्व एशिया में अवस्थित देश- थाईलैंड पिछले कई वर्षों से भारत के बाद चावल के निर्यात में दूसरे स्थान पर बरकरार है लेकिन अगले साल आगामी वर्ष 2026 में यह वियतनाम से भी पिछड़ कर तीसरे नंबर पर आ सकता है।
दरअसल चावल के निर्यात में दूसरे एवं तीसरे पोजीशन के लिए थाईलैंड और वियतनाम के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा रहती है जबकि इन दोनों देशों के संयुक्त निर्यात से भी अधिक मात्रा में चावल का शिपमेंट करता है। चावल के वैश्विक निर्यात बाजार में भारत की भागीदारी 40-42 प्रतिशत रहती है।
थाई राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार वर्ष 2025 की तुलना में 2026 के दौरान थाईलैंड से चावल का कुल निर्यात 12.5 प्रतिशत घटकर 70 लाख टन के करीब सिमट जाने की संभावना है क्योंकि थाई मुद्रा- बहत काफी मजबूत स्थिति में है।
इससे विदेशी खरीदारों को थाईलैंड से चावल खरीदना महंगा पड़ सकता है। आमतौर पर थाईलैंड चावल का निर्यात ऑफर मूल्य अन्य एशियाई आपूर्तिकर्ता देशों की तुलना में ऊंचे स्तर पर रहता है।
निर्यातकों का कहना है कि अमरीकी डॉलर के मुकाबले थाईलैंड की बहत की विनिमय दर भारत और पाकिस्तान के रूपया, वियतनाम के डांग तथा म्यांमार के क्यात से काफी ऊंची और मजबूत बनी हुई है। इससे आयातक देशों की दिलचस्पी थाई चावल में घट सकती है।
थाई चावल के प्रमुख खरीदार देश- इंडोनेशिया चीन, फिलीपींस एवं मलेशिया में आयातक काफी सतर्क हो गए हैं। वे सस्ते चावल की खरीद के लिए वैकल्पिक बाजार की तलाश कर रहे हैं।
एशिया, अफ्रीका एवं लैटिन अमरीका के अन्य आयातक देशों में थाईलैंड के चावल निर्यातकों को भारत, वियतनाम, पाकिस्तान, म्यांमार एवं अमरीका जैसे देशों की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
वैसे वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया एवं फिलीपींस जैसे देशों में जोरदार तूफानी वर्षा एवं भयंकर बाढ़ से धान की फसल आंशिक रूप से प्रभावित हुई है।
