अल नीनो के प्रभाव से मानसून सीजन में बारिश कम होने की आशंका
17-Feb-2026 05:46 PM
मुम्बई। एक प्राइवेट मौसम पूर्वानुमान एजेंसी का कहना है कि ला नीना मौसम चक्र अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है और मार्च में अल नीनो मौसम चक्र का न्यूट्रल चरण आरंभ हो सकता है। यह न्यूट्रल का उदासीन दौर क्रमिक रूप से आगे बढ़ते हुए अंततः अल नीनो की सक्रिय अवस्था तक पहुंच सकता है
जिससे जून-सितम्बर के चार माह की अवधि में सक्रिय रहने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान वर्षा सामान्य औसत से कम होने की आशंका है। आमतौर पर अल नीनो की सक्रियता वाले वर्ष के दौरान भारत में मानसून कुछ कमजोर पड़ जाता है।
मौसम एजेंसी के मुताबिक विषुवतीय प्रशांत क्षेत्र में मार्च 2026 तक ला नीना का दौर शिफ्ट होकर अल नीनो सॉदर्न ऑसिलेशन (एनसो) की उदासीन आस्था में रूपांतरित हो जाने की 75 प्रतिशत संभावना है। अल नीनो मौसम चक्र के एकाएक पूरी तरह विकसित होने की तुलना में धीमी गति से होने वाला विकास ज्यादा चिंताजनक एवं हानिकारक साबित हो सकता है।
इस बात की 60 प्रतिशत संभावना रहती है कि अल नीनो का धीमा विकास मानसून की गतिशीलता तीव्रता एवं सघनता को प्रभावित करे। वर्ष 2026 में भी यही स्थिति बन सकती है जिससे भारत सहित कई अन्य क्षेत्रों / देशों में बारिश कम होने की संभावना बन सकती है।
एजेंसी के अनुसार मौसम चक्र की न्यूट्रल स्थिति वह होती है जब अल नीनो एवं ला नीना-दोनों में से कोई भी सक्रिय नहीं होता है। उत्तरी गोलार्द्ध में बसंतकाल के अंतिम दिनों तक यह स्थिति बरकरार रहने की संभावना है। इसके बाद ला नीना कमजोर पड़ेगा अल नीनो मजबूत होता जाएगा। इसकी मजबूत तीव्रता एवं सक्रियता के अनुरूप ही दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल प्रभावित होगी।
भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए मानसून अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी सीजन के दौरान देश में खरीफ कालीन फसलों की खेती एंव प्रगति होती है जिसमें धान, तुवर, उड़द, मूंग, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, सोयाबीन, मूंगफली एवं कपास आदि शामिल है। अच्छी एवं सामयिक वर्षा बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक होती है।
