अमरीका के साथ हुए व्यापारिक करार में अधिकांश कृषि उत्पाद है सुरक्षित

19-Feb-2026 07:56 PM

नई दिल्ली। हालांकि भारत और अमरीका के बीच हुए अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौता के अंतर्गत भारत में कुछ अमरीकी कृषि उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क में छूट दी गई है और कुछ और शुल्कीय बंदिशों को हटाने का संकेत भी दिया गया है लेकिन अनेक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों के लिए उसे कोई राहत या रियायत नहीं दी गई है। इसमें चावल, गेहूं, मक्का, डेयरी एवं पॉल्ट्री उत्पाद आदि शामिल है। 

महत्वपूर्ण बात यह है कि अमरीका अपने जीएम मक्का एवं सोयाबीन के लिए भारत पर अपना बाजार खोलने के लिए जबरदस्त दबाव डाल रहा था लेकिन अब भारत इसके लिए तैयार नहीं हुआ तब उसे सोया तेल एवं डीडीजीएस के निर्यात पर मिली कुछ छूट से ही संतोष करना पड़ा।

इसी तरह डेयरी उत्पादों के निर्यात पर भी अमरीका को कोई अतिरिक्त रियायत नहीं मिली और न ही भारत उसे पॉल्ट्री उत्पादों पर कोई छूट देने के लिए तैयार हुआ। जहां तक चावल और गेहूं का सवाल है तो भारत इसके उत्पादन में न केवल पूरी तरह आत्मनिर्भर है बल्कि चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश भी बना हुआ है। करीब 4 साल के बाद अब सरकार ने गेहूं का निर्यात भी कोटा प्रणाली के तहत खोल दिया है। 

लेकिन सोया तेल एवं डीडीजीएस के आयात पर दी गई छूट विवाद का विषय बन गई है क्योंकि इससे सोयाबीन, सोयामील तथा मक्का के दाम पर असर पड़ने की संभावना है। आरंभिक दौर से ही इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव देखा जा रहा है।

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि अमरीका ने भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क में केवल कुछ कटौती की है- उसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया है जबकि भारत में उसके कुछ उत्पादों के लिए शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई है।

अमरीका से सूखे मेवों (ड्राई फ्रिट्स या ट्री नट्स) के आयात को भी सस्ता बनाया गया है अमरीका में भारत को कोई  एक तरफा या विशेष छूट नहीं मिली है और सिर्फ आयात शुल्क को अन्य प्रतिद्वंदी देशों की तुलना में कुछ नीचे रखा गया है।