अमरीका से सोयाबीन एवं मक्का के आयात की अनुमति देने पर संदेह बरकरार

18-Nov-2025 12:55 PM

नई दिल्ली। हालांकि भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम दौर में पहुंचने का दावा दोनों पक्षों की ओर से किया जा रहा है लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भारत ने अमरीकी सोयाबीन एवं मक्का के आयात की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की है या नहीं।

कुछ जानकारों का कहना है कि भारत अमरीका से सोयाबीन तथा मक्का के शुल्क मुक्त आयात की स्वीकृति देने तथा कुछ खास डेयरी उत्पादों का आयात करने के लिए भी राजी हो गया है लेकिन जब तक करार की आधिकारिक घोषणा नहीं होती है तब तक इस मामले में संदेह बरकरार रहेगा।

दरअसल स्वयं प्रधानमंत्री सार्वजनिक मंच से घोषणा कर चुके हैं कि भारत सरकार अपने किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। 

विश्लेषकों के मुताबिक अमरीका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार रहा है लेकिन अगस्त 2025 के अंत से वहां अनेक भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लागू होने से भारत के निर्यातकों को अन्य देशों के पास जबरदस्त प्रतिस्पर्धा करने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

भारत ने रूस से खनिज तेल का आयात घटाने की अमरीकी मांग को पहले ही स्वीकार कर लिया है जिससे टैरिफ के मामले में अमरीका का रवैया कुछ नरम पड़ा है। अमरीकी बाजार में निर्यात घटने से भारत को काफी नुकसान हो रहा है जिसे नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता है। 

समझा जाता है कि नवम्बर 2025 के अंत तक द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है और अमरीका भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत के अतिरिक्त आयात शुल्क को वापस ले सकता है। लेकिन इसके लिए भारत को भी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

यदि सचमुच वहां से जीएम सोयाबीन अथवा इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों, मक्का तथा डेयरी उत्पादों का भारी आयात आरंभ होता है तो उससे भारतीय किसानों को जबरदस्त नुकसान होने की आशंका बढ़ जाएगी। मक्का और सोयाबीन का भाव पहले ही घटकर नीचे आ चुका है।