अमरीकी टैरिफ में रियायत से भारतीय मसाला एवं काजू उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद

17-Nov-2025 05:09 PM

मुम्बई। अमरीका ने 200 से ज्यादा खाद्य उत्पादों के आयात पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगा दिया था जिससे वहां इन उत्पादों का दाम काफी बढ़ गया और खाद्य महंगाई में वृद्धि होने से आम लोगों को भारी कठिनाई होने लगी।

इसे देखते हुए सरकार ने अब दर्जनों खाद्य उत्पादों को आयात शुल्क में रियायत देने की घोषणा की है जिससे भारत को अपनी खोई हुई मांग को पूरा करने में सहायता मिल सकती है।

यूरोपीय संघ और वियतनाम के उत्पादों पर 15-20 प्रतिशत का ही आयात शुल्क लगा हुआ था जबकि भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाया गया था इससे अमरीका में भारतीय उत्पादों का मूल्य गैर प्रतिस्पर्धी हो गया। 

अमरीका में 50 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू होने से भारतीय मसालों, प्रसंस्कृत काजू, चाय तथा कॉफी आदि का निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने लगा था और वस्त्र उद्योग पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा था लेकिन अब उसकी स्थिति काफी हद तक सामान्य हो जाने की संभावना है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन  एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के महानिदेशक का कहना है कि शुल्क रियायत के बाद भारत को 2.50 से 3 अरब डॉलर के बीच निर्यात बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। 

अमरीकी राष्ट्रपति के आदेश से प्रीमियम क्वालिटी, विशिष्ट श्रेणी एवं मूल्य संवर्धित किस्म के उत्पादों के लिए दरवाजा पुनः खुल गया है जो निर्यातक उच्च क्वालिटी के प्रीमियम उत्पादों का निर्यात करने में व्यस्त है उन्हें विशेष फायदा हो सकता है। वे अब बढ़ती उपभोक्ता मांग को पूरा करने में जोरदार सक्रियता दिखा सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि अमरीका में खासकर भारतीय कालीमिर्च के आयात पर लगे टैरिफ को हटाने की जोरदार मांग उठ रही थी।

इसके अलावा जिन मसालों एवं उत्पादों का उत्पादन अमरीका में नहीं या नगण्य होता है उसके आयात को भी सस्ता करने का आग्रह किया जा रहा था।

अगस्त के अंत में 50 प्रतिशत का टैरिफ लागू होने से अमरिका में भारतीय उत्पादों का निर्यात करीब 12 प्रतिशत घटकर 5.43 अरब डॉलर पर सिमट गया। वर्ष 2024 में वहां 87 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था जिसमें कृषि उत्पादों के शिपमेंट की भागीदारी 5.70 अरब डॉलर की रही थी।