अमरीकी टैरिफ से काजू निर्यात को कोई खतरा नहीं
01-Aug-2025 10:56 AM
मंगलोर। भारत के काजू निर्यातक अमरीकी टैरिफ से ज्यादा चिंतित नहीं है और उसका कहना है कि नए टैरिफ से वहां भारतीय काजू के निर्यात के लिए कोई गंभीर खतरा नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि अमरीका में 1 अगस्त 2025 से भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाने की घोषणा हुई है।
एक अग्रणी व्यापारिक फर्म का मानना है कि भारतीय काजू से निर्यात की दृष्टि से अमरीका एक छोटा बाजार है और नई उभरती परिस्थिति से भारतीय काजू क्षेत्र पर कोई गहरा प्रत्यक्ष प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना नहीं है।
लेकिन अमरीका में अन्य सभी आपूर्तिकर्ता देशों और खासकर वियतनाम, इंडोनेशिया तथा ब्राजील से इसके आयात पर असर पड़ सकता है क्योंकि इन देशों से आयातित वस्तुओं पर वहां ऊंची दर का शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया है।
इससे अमरीका में काजू का भाव स्वाभाविक रूप से बढ़ जाएगा और उपभोक्ताओं को परेशानी होगी। वहां इसकी खपत में कमी आ सकती है।
उल्लेखनीय है कि चालू के सम्पूर्ण वैश्विक आयात में अकेले अमरीका की भागीदारी 18-20 प्रतिशत रहती है इसलिए वहां आयात महंगा होने पर काजू के वैश्विक बाजार मूल्य पर कुछ असर पड़ सकता है।
लेकिन दीर्घकाल में बाजार इस स्थिति के साथ सामंजस्य बैठाने में सफल हो सकता है जिससे काजू की मांग एवं कीमत में स्थिरता आ सकती है।
अमरीका में मई से ही 10 प्रतिशत का आयात शुल्क सभी निर्यातक देशों के उत्पादों पर लागू है और बाजार इसे एडजस्ट कर चुका है। व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक कुल मिलाकर अमरीकी टैरिफ का भारतीय काजू क्षेत्र पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा और वैश्विक काजू क्षेत्र भी ज्यादा प्रभावित नहीं होगा।
अमरीका बाजार में भारतीय काजू के निर्यात की भागीदारी सीमित है। वहां फ्रेश एवं सूखे (ड्राय) काजू की भागीदारी महज 0.9 प्रतिशत एवं संरक्षित (प्रिजर्व) काजू की हिस्सेदारी करीब 6 प्रतिशत है।
वियतनाम को वहां निर्यात जारी रखने में असुविधा हो सकती है जो इसका सबसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश है। दूसरी ओर कोट डी आइवरी एवं बेनिन जैसे अफ्रीकी देशों को अमरीका में काजू का निर्यात बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल सकता है।
