अनाज आधारित एथनॉल का उत्पादन बढ़ने से अनेक उद्देश्यों की पूर्ति
24-Nov-2025 01:55 PM
नई दिल्ली। भारत में टूटे चावल, मक्का एवं क्षतिग्रस्त अनाज से हाल के वर्षों में एथनॉल के उत्पादन में शानदार बढ़ोत्तरी हुई है और आगामी वर्षों में भी इसका सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।
इससे एक साथ अनेक उद्देश्यों को पूरा करने में सहायता मिल रही है जिसमें आपदा को अवसर में बदलना, हरित ऊर्जा के संकल्प को मजबूत बनाना, ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना तथा रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करना आदि शामिल है।
पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य नियत समय से 5 वर्ष पूर्व ही हासिल कर लिया गया जिसमें अनाज से निर्मित एथनॉल का विशेष योगदान है।
चालू मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के लिए भी पेट्रोलियम कंपनियों का ज्यादा कोटा आवंटित किया गया है। भारत में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए नव सृजनात्मक (इनोवेटिव) गतिविधियां तेजी से बढ़ाई जा रही हैं
जिससे भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने तथा जीवाश्म ईंधन (पेट्रोलियम) के आयात घटाने और इस तरह विदेशी मुद्रा की बचत करने में अच्छी सहायता मिलने की उम्मीद है। भारत पेट्रोलियम के अग्रणी आयातक देशों में शामिल रहा है।
अनाज आधारित एथनॉल का उत्पादन तेजी से बढ़ने का प्रमुख कारण खाद्यान्न का अधिशेष उत्पादन होना है। हाल के वर्षों में चावल, गेहूं एवं मक्का आदि के घरेलू उत्पादन में जोरदार बढ़ोत्तरी हुई है
जिससे एथनॉल निर्माण के लिए डिस्टीलरीज को समुचित मात्रा में सुगमता से कच्चा माल हासिल हो रहा है। अनाज से निर्मित एथनॉल का दाम भी डिस्टीलरीज के लिए लाभप्रद स्तर पर है जबकि मक्का का घरेलू बाजार भाव घटकर काफी नीचे स्तर पर आ गया है।
