अप्रैल में ऑयल मील का निर्यात गत वर्ष के लगभग बराबर

19-May-2025 03:13 PM

मुम्बई। एक अग्रणी उद्योग संगठन- साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025-26 के प्रथम माह यानी अप्रैल 2025 के दौरान देश से कुल मिलाकर 4,65,863 टन ऑयल मील का निर्यात हुआ जो अप्रैल 2024 के शिपमेंट म 4,65,156 टन से थोड़ा अधिक रहा।

समीक्षाधीन माह के दौरान सोया डीओसी का निर्यात 1,99,803 टन से बढ़कर 2,30,743 टन तथा मूंगफली एक्सट्रैक्टर्स का शिपमेंट 156 टन से उछलकर 3127 टन पर पहुंचा

लेकिन दूसरी ओर खल सरसों (रेपसीड मील) का निर्यात 2,30,810 टन से घटकर 2,13,023 टन तथा अरंडी मील का निर्यात 34,387 टन से गिरकर 18,970 टन पर अटक गया। राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के निर्यात पर लम्बे समय से प्रतिबंध लगा हुआ है। 

एसोसिएशन के अनुसार 2024-25 के खरीफ सीजन के दौरान भारत में सोयाबीन का शानदार उत्पादन हुआ जबकि रबी सीजन में सरसों की पैदावार भी अच्छी हुई।

इससे मिलों में दोनों महत्वपूर्ण तिलहनों की भारी क्रशिंग हो रही है और ऑयल मील की आपूर्ति एवं उपलब्धता की हालत सुगम हो गई है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार के सापेक्ष 'पड़ता' नहीं पड़ने से आयातकों का उत्साह एवं आकर्षण भारतीय ऑयल मील में कम हो गया है। 

जहां तक मार्केटिंग सीजन का सवाल है तो नवम्बर 2024 से अप्रैल 2025 की छमाही के दौरान सोयामील का आयात 2023-24 सीजन की समान अवधि के शिपमेंट 16.58 लाख टन से घटकर 13.35 लाख टन तथा रेपसीड मील का निर्यात 9.30 लाख टन से फिसलकर 9.11 लाख टन पर अटक गया।

चीन में सरसों खल की मांग बढ़ने के संकेत मिले थे लेकिन फिर भी अप्रैल में इसका शिपमेंट कुछ घट गया। समीक्षाधीन छमाही के दौरान अरंडी मील का निर्यात भी 1.94 लाख टन से घटकर 1.52 लाख टन पर सिमट गया।  

चीन सरकार द्वारा कनाडा के कैनोला तेल एवं मील पर 100 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाए जाने से वहां भारतीय रेपसीड मील का निर्यात बढ़ाने का अच्छा अवसर और आधार बन रहा है।

यूरोपीय संघ से भी चीन में रेपसीड मील मंगाया जाता है लेकिन वहां इसका भाव ऊंचा चल रहा है। हालांकि चीन में भारतीय रेपसीड मील के आयात पर कुछ कठोर शर्तें लागू है लेकिन बदलते हालात को देखते हुए अगर वहां इन शर्तों में छूट या रियायत दी जाती है तो चीन का विशाल बाजार भारत के लिए खुल सकता है।