बांग्ला देश की चावल आयात-निर्यात नीति से भारतीय निर्यातक नाखुश

24-Apr-2025 01:10 PM

नई दिल्ली। बांग्ला देश के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 133 फर्मों को कुल मिलाकर 18,150 टन सुगन्धित चावल का निर्यात करने की अनुमति दी गई है। प्रत्येक कम्पनी को उसकी क्षमता के आधार पर 100 से 500 टन तक का निर्यात कोटा आवंटित किया गया है।

वैसे इस चावल के निर्यात के लिए कुछ शर्तें भी नियत की गई है। इसके तहत चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) 1.60 डॉलर प्रति किलो होगा,

कोई भी निर्यातक अपने लिए आवंटित कोटे से अधिक मात्रा में चावल का शिपमेंट नहीं करेगा, कोई भी निर्यातक अपने आवंटित कोटे को किसी दूसरे निर्यातक को नहीं देगा और सरकार कभी भी इसके निर्यात पर रोक लगा सकती है। 

भयंकर बाढ़ एवं प्रतिकूल मौसम के कारण बांग्ला देश में गंभीर खाद्य संकट उत्पन्न होने के बाद अक्टूबर 2023 में सरकार ने चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन जनवरी 2025 में इसके शिपमेंट की अनुमति देने का निर्णय लिया गया और अप्रैल में कोटे की घोषणा की गई।

बांग्ला देश से चावल का निर्यात 2009-10 से आरंभ हुआ था और वहां से दुनिया के करीब 140 देशों को थोड़ी-बहुत मात्रा में इसका शिपमेंट होता रहा जिसमें यूरोप, अमरीका एवं संयुक्त अरब अमीरात आदि शामिल थे।

इधर एक भारतीय निर्यातक का कहना है कि भारत बांग्ला देश को सस्ते दाम पर चावल उपलब्ध करवा रहा है जबकि बांग्ला देश पाकिस्तान के साथ व्यापार को प्रोत्साहित कर रहा है।

यह भारत के साथ दगाबाजी है। भारतीय निर्यातकों को बांग्ला देश में आपूर्ति के लिए अपने चावल का मूल्य बढ़ाना चाहिए ताकि उसे इसकी अहमियत का पता चल सके।

लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है। इसके बजाए बांग्ला देश को सस्ते दाम पर चावल बेचने के लिए भारतीय निर्यातकों में होड़ मची हुई है।

इसका नतीजा यह हुआ कि बांग्ला देश की सरकार ने 50-50 हजार टन की खेप में कुल 6 लाख टन चावल के आयात का प्लान बनाया। चावल आयात के प्रथम टेंडर में ऑफर मूल्य 477 डॉलर प्रति टन रहा था जो हाल के टेंडर में घटकर 394.77 डॉलर प्रति टन रह गया। सुगन्धित चावल का निर्यात कोटा घोषित होने से भारत की इसी श्रेणी के चावल के निर्यात के लिए चुनौती कुछ बढ़ जाएगी।