भारत में पाम तेल के आयात में अफ्रीका दे सकता है योगदान

30-Jun-2026 05:50 PM

मुम्बई। दुनिया में पाम तेल का सबसे ज्यादा आयात भारत में होता है जिससे स्पष्ट पता चलता है कि भारत इस वनस्पति तेल के आयात पर बहुत अधिक निर्भर रहता है। पाम तेल वस्तुतः भारतीय वनस्पति तेल बाजार को संतुलित रखने में आधार का काम करता है। लेकिन यह आधार कई बार समस्या भी खड़ी कर देता है। 

परमपरागत रूप से भारत में पाम तेल का सर्वाधिक आयात इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से होता रहा है। भारत में करीब 85-95 लाख टन के बीच पाम तेल उत्पादों का वार्षिक आयात होता है जिससे आपूर्तिकर्ता देशों को अपना खजाना भरने का बेहतरीन अवसर मिल जाता है। पाम तेल का घरेलू उत्पादन अभी बहुत कम या नगण्य हो रहा है।

दक्षिण-पूर्व एशिया के आपूर्तिकर्ता देशों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने के कारण भारत को अन्य निर्यातक देशों की तरफ जाने की कोई खास आवश्यकता महसूस नहीं हुई जबकि इस विकल्प को आजमाने से फायदा हो सकता था। अफ्रीका महाद्वीप के अनेक देशों में पाम तेल का उत्पादन होता है जो अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर उपलब्ध रहता है।

अगर वहां से आयात बढ़ाने का प्रयास किया जाए तो भारतीय पाम तेल बाजार पर इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड का वर्चस्व घटाने में सहायता मिलेगी और इन देशों पर अपने उत्पाद के दाम को उचित स्तर पर रखने का दबाव भी पड़ेगा। 

इंडोनेशिया में 1 जुलाई 2026 से बी 50 प्रोग्राम लागू होने वाला है जिसके लिए उसे 180 लाख टन पाम तेल की जरूरत पड़ेगी। इससे वहां निर्यात योग्य अधिशेष स्टॉक में कमी आएगी और मलेशिया को अपने पाम तेल उत्पादों का दाम बढ़ाने का अवसर मिल जाएगा। इससे भारत जैसे विशाल आयातक देश को कठिनाई होगी। यदि अफ्रीका से आयात बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए तो भारत को राहत मिल सकती है।