ऊंचे भाव एवं घरेलू मांग के कारण सोयामील के निर्यात में गिरावट
30-Jun-2026 04:40 PM
मुम्बई। अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में भारतीय सोयामील गैर प्रतिस्पर्धी हो गया है और इसका भाव अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों की तुलना में काफी ऊंचा चल रहा है। इसके फलस्वरूप दक्षिण-पूर्व एशिया के परम्परागत बाजारों के साथ अन्य आयातक देशों में भारतीय सोया डीओसी की मांग कमजोर पड़ गई है।
लेकिन ऊंची कीमतों के बावजूद स्वदेशी पशु आहार एवं पॉल्ट्री फीड निर्माण उद्योग में सोयामील की मांग मजबूत बनी हुई है। जिससे इसके निर्यात योग्य अधिशेष स्टॉक में कमी आ गई है और इसका शिपमेंट कम हो रहा है। कई देश इसकी खरीद घटा रहे हैं।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि हाल के महीनों में सोयाबीन के थोक मंडी भाव एवं प्लांट डिलीवरी मूल्य में जबरदस्त इजाफा हुआ है जिससे सोयामील का लागत खर्च काफी बढ़ गया है और मिलर्स को इसका दाम बढ़ाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
जब तक घरेलू उत्पादन में जोरदार वृद्धि नहीं होती है अथवा क्रशिंग-प्रोसेसिंग के लिए विदेशों से सोयाबीन का भारी आयात नहीं किया जाता है तब तक भारत में सोयामील का निर्यात योग्य स्टॉक सीमित ही रहेगा।
देश के अंदर डिस्टीलर्स ड्राईड ग्रेन्स विद सोल्युबल्स (डीडीजीएस) की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ती जा रही है जो एथनॉल निर्माण के दौरान बनता है। यह डीडीजीएस सोयाबीन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनता जा रहा है।
डीडीजीएस का भाव प्रतिस्पर्धी स्तर पर रहता है इसलिए यह पशु आहार एवं पॉल्ट्री फीड निर्माण उद्योग में राइस ब्रान तथा रेपसीड मील के साथ-साथ कुछ हद तक सोयामील को भी विस्थापित कर रहा है।
इस बार अफ्रीकी देशों से गैर जीएम सोयाबीन का रिकॉर्ड आयात हो रहा है जो घरेलू तिलहन से कुछ सस्ता पड़ता है। लेकिन सोयाबीन की बिजाई की गति बहुत धीमी है जिससे उत्पादन के प्रति चिंता बढ़ गई है।
