भारत से कारोबार बंद होने पर बांग्ला देश होगा बुरी तरह प्रभावित

25-Dec-2025 03:38 PM

नई दिल्ली। बांग्ला देश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार और बिगड़ती कानून व्यवस्था को देखते हुए कुछ निर्यातक वहां चावल का निर्यात रोके जाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं जबकि कुछ संगठन उसके साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने की मांग कर रहे हैं।

भारत से बांग्ला देश को सिर्फ चावल ही नहीं बल्कि कई अन्य खाद्य एवं कृषि उत्पादों का भी निर्यात बड़े पैमाने पर होता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। 

बांग्ला देश सरकार ने 50 हजार टन भारतीय चावल की खरीद की स्वीकृति प्रदान की है। उसके वित्त सलाहकार का कहना है कि आर्थिक हितों को राजनीति से अलग रखा जा रहा है।

यदि वियतनाम चावल किसी अन्य आपूर्तिकर्ता देश की तुलना में भारतीय चावल सस्ता पड़ता है तो इसकी खरीद करना ही बेहतर है। बांग्ला देश में भारत से होने वाला चावल का आयात करीब 2-10 टका प्रति किलो सस्ता बैठ रहा है। 

अगर भारत और बांग्ला देश के बीच द्विपक्षीय व्यापार स्थगित हो जाये तो भारत को कम और बांग्ला देश को भारी कठिनाई हो सकती है। दोनों देशों के बीच  रिश्ते अभी सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं

लेकिन बांग्ला देश के वित्त सलाहकार का कहना है कि सम्बन्धों में इसकी खटास नहीं आई है कि द्विपक्षीय व्यापार बंद करना पड़े। बांग्ला देश भारत के साथ आर्थिक एवं व्यापारिक सम्बन्ध को बरकरार रखना चाहता है। 

कुछ भारतीय निर्यातक बांग्ला देश को चावल का निर्यात रोकने की मांग कर रहे हैं क्योंकि वहां इसको जोखिम या खतरा होने की आशंका है।

अन्य निर्यातकों  को बांग्ला देश के लिए चावल का निर्यात ऑफर मूल्य ऊंचा रखने का सुझाव दिया जा रहा है। इससे उसे अन्य देशों से महंगा चावल खरीदना पड़ेगा। 

भारत से बांग्ला देश को चावल के अलावा मक्का, मसाला, सोयाबीन तथा चीनी सहित कई अन्य उत्पादों का निर्यात किया जाता है। पहले वहां गेहूं भी भेजा जाता था मगर अब नहीं भेजा जा रहा है क्योंकि भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है।

भारत से बांग्ला देश को 94 प्रतिशत निर्यात सड़क सीमा मार्ग से होता है जिससे उत्पाद का खर्च कम बैठता है और समय भी ज्यादा नहीं लगता है। भारत वहां आलू, प्याज, लहसुन, फल, सब्जी एवं दवाई आदि का निर्यात भी करता है। बांग्ला देश का कपड़ा उद्योग भारतीय रूई पर काफी हद तक निर्भर रहता है।