भारतीय बंदरगाहों पर लगभग 10 लाख टन पीली मटर का स्टॉक मौजूद

26-Sep-2024 08:37 PM

मुम्बई । दाल-दलहन उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक अग्रणी संगठन- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के चेयरमैन का कहना है कि 31 दिसम्बर 2023 से 15 सितम्बर 2024 के दौरान देश में लगभग 22 लाख टन पीली मटर का आयात हुआ जिसमें से करीब 10 लाख टन का स्टॉक अब भी भारतीय बंदरगाहों पर मौजूद है।

इसके अलावा मध्य नवम्बर तक 8 लाख टन पीली मटर का और आयात हो सकता है। वैश्विक बाजर में तकरीबन 100 लाख टन पीली मटर का विशाल स्टॉक उपलब्ध है इसलिए इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी रहेगी। 

एसोसिएशन के चेयरमैन ने पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा में दो माह की बढ़ोत्तरी करने में सरकारी निर्णय को अनावश्यक बताते हुए कहा कि इससे कनाडा जैसे देशों को फायदा होगा जबकि भारतीय दलहन बाजार में कीमतों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

चेयरमैन ने सरकार को 30-40 लाख टन दलहनों का बफर स्टॉक बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।

उनका कहना था कि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान देश में 47.30 लाख टन दलहनों का विशाल आयात हुआ जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में कुल आयात इसके बराबर या इससे कुछ कम हो सकता है।

चेयरमैन के अनुसार नवम्बर के बाद दाल-दलहन बाजार में स्थिरता आएगी और कीमतों में कोई खास इजाफा नहीं होगा।

ऑस्ट्रेलिया में चना का उत्पादन बढ़कर 20 लाख टन तक पहुंच जाने का अनुमान है और अगले कुछ सप्ताहों में वहां इसकी नई फसल आने लगेगी।

इधर भारत में 2024-25 के वर्तमान खरीफ सीजन में तुवर का उत्पादन बढ़कर 42 लाख टन पर पहुंच सकता है जो 2023-24 सीजन के उत्पादन से काफी अधिक होगा।

हालांकि दलहन उद्योग में पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात के निर्णय को वापस लेने तथा काबुली चना पर लगे आयात शुल्क को हटाने का आग्रह किया था लेकिन सरकार ने इसे नजर अंदाज कर दिया। मालूम हो कि काबुली चना पर 40 प्रतिशत का बुनियादी आयात शुल्क लगा हुआ है।

एसोसिएशन के चेयरमैन का कहना है कि जब काबुली चना का भाव शीर्ष स्तर पर था तभी इसके सीमा शुल्क को हटाना चाहिए था।

अब यदि इसे समाप्त किया जाता है तो कोई खास फायदा नहीं होगा क्योंकि जब तक अक्टूबर-नवम्बर में इसका आयात शुरू होगा तब तक ऑस्ट्रेलिया से भी देसी चना की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।