भारतीय चावल निर्यातकों को बांग्ला देश के आयात टेंडर में भाग नहीं लेने का सुझाव

24-Dec-2025 08:51 PM

नई दिल्ली। बांग्ला देश में अत्यन्त भयावह स्थिति को देखते हुए भारत के कुछ निर्यातक वहां चावल का निर्यात जारी रखने का विरोध कर रहे हैं।

निर्यातकों का एक वर्ग जहां एक ओर केन्द्र सरकार से बांग्ला देश के लिए चावल के निर्यात पर सीधा प्रतिबंध लगाने का आग्रह कर रहा है वहीं दूसरी तरफ अन्य निर्यातकों की बांग्ला देश के आयात टेंडर में भाग नहीं लेने की सलाह भी दे रहे हैं। 

बांग्ला देश में हालत असामान्य हैं और कानून व्यवस्था की स्थिति अत्यन्त खराब है। रोजाना कुछ न कुछ ऐसी घटना हो रही है जो विचलित करने वाली होती है। वहां चावल का निर्यात करने में जोखिम बढ़ गया है।

बांग्ला देश में 2025-26 के दौरान कम से कम 9 लाख टन चावल के आयत का प्लान बनाया गया है जिसे 50-50 हजार की खेपों में मंगाया जाएगा। रणनीतिक स्टॉक को मजबूत बनाने तथा घरेलू बाजार भाव को स्थिर रखने के लिए इस चावल का आयात करना आवश्यक माना जा रहा है। 

 निर्यातकों का कहना है कि बांग्ला देश में पिछले दो वर्षों के दौरान भारत से 10 लाख टन से भी कम चावल का आयात किया गया। जिसे देखते हुए उसे प्रमुख बाजार नहीं माना जा सकता है।

दरअसल भारतीय गैर बासमती चावल का सबसे बड़ा बाजार अफ्रीका है। यदि भारत से बांग्ला देश को चावल का निर्यात बंद कर दिया जाए तो उसे भारी कठिनाई हो सकती है। पाकिस्तान, वियतनाम एवं थाईलैंड जैसे देशों से चावल मंगाना काफी महंगा पड़ेगा और उसमें समय भी ज्यादा लगेगा। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस 9 लाख टन चावल के प्रस्तावित आयात में से 2 लाख टन की खरीद म्यांमार वियतनाम एवं पाकिस्तान जैसे देशों से सरकारी स्तर पर की जाएगी जिसमें निर्यातक देशों के प्राइवेट व्यापारी शामिल होंगे। बांग्ला देश में करीब 6 लाख टन सेला चावल तथा शेष कच्चा (सफेद) चावल मंगाया जा सकता है।

अभी तक चावल आयात के 10 टेंडर जारी किए जा चुके हैं। दसवां टेंडर 22 दिसम्बर को जारी हुआ जिसमें भारतीय बिडर्स का ऑफर सबसे आकर्षक माना जा रहा है। रूस में से छह टेंडर को भारतीय फर्मों ने हासिल कर लिया।