बेहतर उत्पादन एवं मजबूत मांग से कालीमिर्च उत्पादकों के लिए अच्छा रहा पिछला साल

01-Jan-2025 12:58 PM

कोच्चि । विदेशों और खासकर श्रीलंका से आयात बढ़ने के बावजूद 2024 का साल भारतीय कालीमिर्च उत्पादकों के लिए कुल मिलाकर काफी दुखद रहा क्योंकि एक तो कालीमिर्च के उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई और दूसरे, इसकी मांग एवं कीमत भी मजबूत बनी रही।

लेकिन वर्ष 2025 में हालात उतनी अच्छी रहने की उम्मीद नहीं है क्योंकि प्रतिकूल मौसम के कारण उत्पादन आंशिक रूप से प्रभावित होने की आशंका है। 

मोटे अनुमान के अनुसार वर्ष 2023 में लगभग 80-85 हजार टन कालीमिर्च का घरेलू उत्पादन हुआ था जो वर्ष 2024 में बढ़कर एक लाख टन के करीब पहुंच गया। हालांकि उद्योग-व्यापार क्षेत्र का उत्पादन अनुमान इससे काफी नीचे था।

लेकिन इतना अवश्य है कि कालीमिर्च की मांग काफी हद तक मजबूत बनी रही जिससे उत्पादकों को अच्छा लाभ प्राप्त हो गया। यदि विदेशों से भारी आयात नहीं होता तो उसकी कमाई और भी बढ़ सकती थी। 

समझा जाता है कि तमिलनाडु, कर्नाटक एवं शीघ्र प्रदेश जैसे राज्यों के नए-नए क्षेत्रों में कालीमिर्च के बागान लगाए गए थे जिसमें पिछले साल से उत्पादन बढ़ने लगा है।

केरल एवं कर्नाटक के परम्परागत उत्पादक इलाकों में भी वर्ष 2024 के दौरान अनुकूल मौसम के कारण कालीमिर्च की उपज दर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। 

भारतीय कालीमिर्च एवं मसाला व्यापार संघ (इप्सता) के निदेशक के हवाले से इंडियन पीपर कम्युनिटी (आईपीसी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024 आरंभ में करीब 51 हजार टन कालीमिर्च का पिछला स्टॉक मौजूद था।

आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम होने से कालीमिर्च की घरेलू मांग एवं खपत बढ़कर 1.31 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई।

इसका प्रमुख कारण रेडीमेड मसाला निर्माताओं की मांग में जोरदार इजाफा होना माना जा रहा है जबकि साबुत कालीमिर्च की खपत में भी अच्छी बढ़ोत्तरी हुई। 

विश्लेषको के अनुसार वर्ष 2024 में विदेशों से कालीमिर्च का आयात भी तेजी से बढ़कर 40 हजार टन के आसपास पहुंच गया जिससे काफी समस्या हो गई।

दरअसल आयातित कालीमिर्च का अधिकांश भाग विभिन्न दिसावरी बाजारों में पहुंच गया और वहां स्वदेशी उत्पाद की तुलना में नीचे मूल्य पर इसकी बिक्री की गई जिससे भारतीय उत्पादकों को नुकसान हुआ।