बाजार भाव कमजोर रहने से कपास की सरकारी खरीद में वृद्धि की संभावना
25-Nov-2025 12:29 PM
मुम्बई। थोक मंडी भाव घटकर नीचे आने तथा आपूर्ति की रफ्तार बढ़ने से किसानों को अपनी कपास की बिक्री में भारी कठिनाई हो रही है। उद्योग- व्यापार क्षेत्र की मांग कमजोर है और विदेशों से सस्ता रूई का भारी-भरकम शुल्क मुक्त आयात हो रहा है।
किसानों की कठिनाई को देखते हुए केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की खरीद शुरू की गई और अब इसकी रफ्तार बढ़ती जा रही है।
कपास की सरकारी खरीद की दैनिक मात्रा बढ़कर एक लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) के स्तर को पार कर गई है। 24 नवम्बर को राष्ट्रीय स्तर पर मंडियों में कपास की आवक भी बढ़कर 2 लाख गांठ से ऊपर पहुंच गई।
सीसीआई के सीएमडी का कहना है कि सिर्फ उड़ीसा को छोड़कर अन्य सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों से एमएसपी पर कपास की सरकारी खरीद आरंभ हो चुकी है।
इसकी दैनिक खरीद एक लाख गांठ से अधिक हो रही है और चालू मार्केटिंग सीजन में अब तक 8 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद हो चुकी है।
चूंकि वैश्विक बाजार में रूई का भाव घटकर नीचे आ गया है और घरेलू मांग भी कमजोर पड़ गई है इसलिए अधिकांश मंडियों में कपास का दाम गिरकर एमएसपी से नीचे आ गया है।
इसके फलस्वरूप सीसीआई को 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में भी विशाल मात्रा में कपास की खरीद करनी होगी।
2024-25 के सीजन में निगम द्वारा करीब 100 लाख गांठ कपास की खरीद की गई थी जबकि चालू सीजन की खरीद उससे भी आगे निकल सकती है।
लम्बे रेशे वाली कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बार 8110 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जबकि इसका थोक मंडी भाव 6500 से 7500 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है।
कहीं-कहीं रूई की क्वालिटी की समस्या है लेकिन फिर भी इसका दाम उम्मीद से काफी नीचे चल रहा है। उल्लेखनीय है कि निगम द्वारा इस बार कपास की खरीद के लिए करीब 570 क्रय केन्द्र खोले गए हैं जिसमें से 400 केन्द्र क्रियाशील हो चुके हैं।
