बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर भंडारण क्षमता के दो-तिहाई भाग से ऊपर
01-Aug-2025 02:11 PM
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की 6 प्रतिशत अधिशेष वर्षा के सहारे देश के 161 प्रमुख बांधों एवं जलाशयों में पानी का स्तर बढ़कर उसकी कुल भंडारण क्षमता के दो तिहाई (66 प्रतिशत) भाग से भी ऊपर पहुंच गया है जिससे खासकर आगामी रबी सीजन की फसलों की सिंचाई के लिए ज्यादा पानी उपलब्ध होगा।
केन्द्रीय जल आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार इन 161 बांधों-जलाशयों में पानी का कुल स्टॉक बढ़कर 126.482 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पर पहुंच गया है जो इसकी कुल भंडारण क्षमता 182.461 बीसीएम का 69.31 प्रतिशत है।
पानी का यह भंडार पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 50 प्रतिशत बिंदु तथा दस वर्षीय औसत के मुकाबले भी करीब 50 प्रतिशत बिंदु ज्यादा है।
मौसम विभाग के अनुसार चार माह की अवधि वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के शुरूआती दो महीनों में यानी जून-जुलाई 2025 के दौरान देश में सामान्य औसत से 6 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई जबकि अगस्त-सितम्बर के अंतिम दो महीनों में भी वर्षा दीर्घकालीन औसत से ज्यादा होने की उम्मीद है।
लेकिन इसके बावजूद देश के 728 जिलों में से करीब 31 प्रतिशत जिलों में अभी तक वर्षा सामान्य स्तर से कम या बहुत कम हुई है जिससे इसके असमान वितरण का संकेत मिलता है।
राष्ट्रीय स्तर पर खरीफ फसलों की बिजाई का परिदृश्य बेहतर नजर आ रहा है और इसके उत्पादन क्षेत्र में 5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की जा चुकी है। अधिशेष बारिश एवं जलाशयों में पानी के ऊंचे स्तर से फसलों की सिंचाई में अच्छी सहायता मिलेगी।
केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश के सात जलाशय पानी से पूरी तरह भरे हुए हैं। गोवा का एकमात्र जलाशय पूरी तरह भर गया है जबकि तमिलनाडु एवं मिजोरम के बांधों का जल स्तर बढ़कर 95 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
कुछ बांधों का गेट खोलना पड़ा है जिससे उसके प्रवाह क्षेत्र में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। कुछ राज्यों में मूसलाधार वर्षा होने एवं नदियों में जल स्तर खतरे के निशान को पार कर जाने के कारण खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं।
मौसम विभाग ने कहा है कि अगले दो सप्ताहों तक मानसून की सक्रियता कुछ घट सकती है। इससे बाढ़ ग्रस्त इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है लेकिन खेतों में जल जमाव के कारण दलहन-तिलहन एवं कपास की फसल पर खतरा बना हुआ है।
