चालू वर्ष के अंत तक भारत में पीली मटर का आयात 33-35 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान
01-Oct-2024 05:57 PM
मुम्बई । शीर्ष व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एन्ड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के चेयरमैन ने वर्ष 2024 के अंत तक देश में पीली मटर का कुल आयात बढ़कर 33 से 35 लाख टन के बीच पहुंच जाने का अनुमान लगाया है।
उनके अनुसार अगस्त 2024 तक देश में लगभग 3 लाख टन पीली मटर का आयात हुआ जबकि सितम्बर-अक्टूबर शिपमेंट के लिए करीब 7 लाख टन का अनुबंध किया जा चुका है और इस तरह अक्टूबर के अंत तक कुल आयात 30 लाख टन के आसपास पहुंच जाएगा।
चूंकि पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 दिसम्बर 2024 तक बढ़ा दिया गया है इसलिए नवम्बर-दिसम्बर में 4-5 लाख टन का अतिरिक्त आयात हो सकता है।
भारत में पीली मटर का सर्वाधिक आयात रूस तथा कनाडा से होता है। रूस में इस बार मटर का उत्पादन कुछ कम हुआ है जिससे इसके निर्यात में गिरावट आ सकती है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार रूस से 2023-24 के सीजन में 31 लाख टन मटर का निर्यात हुआ था जो 2024-25 के सीजन में घटकर 25 लाख टन पर सिमट सकता है। वहां मटर का पिछला बकाया स्टॉक भी बहुत कम था।
उधर कनाडा में सरकार ने इस बार 33 लाख टन मटर के उत्पादन का अनुमान लगते हुए इसकी कुल उपलब्धता 36 लाख टन पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की है।
इसमें से 25 लाख टन मटर का विदेशों में निर्यात हो सकता है। इस तरह 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में रूस तथा कनाडा से 25-25 लाख टन मटर का निर्यात होने का अनुमान है।
आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान का कहना है कि चीन पहले रूस से मटर का आयात नहीं करता था इसलिए वहां कनाडा की मटर का वर्चस्व बना हुआ था।
लेकिन अब हालात बदल गए हैं चीन अपनी जरूरत से आधे भाग की मटर का आयात रूस से करने लगा है और वहां आगे इसमें और बढ़ोत्तरी होने की संभावना है इसलिए मटर के आयात पर उसकी निर्भरता तेजी से घटती जा रही है।
चीन में यूक्रेन से भी मटर के आयात की तैयारी हो रही है। पिछले दो-तीन वषों के दौरान रूस रूस में मटर का उत्पादन तेजी से बढ़ा है और वह कनाडा से भी आगे निकल गया है।
आई पी जी ए के चेयरमैन का कहना है कि भारत में रूस के साथ-साथ कनाडा से भी भारी मात्रा में मटर का आयात जारी रहेगा क्योंकि परिवहन खर्च में ज्यादा नहीं रहता है। रूस से छोटे-छोटे जहाज में मटर मंगाई जाती है जिसका खर्च कुछ ऊंचा बैठता है।
दूसरी ओर कनाडा से 60-70 हजार टन मटर की लोडिंग वाले बड़े-बड़े जहाज आते हैं जिसका खर्च थोड़ा कम होता है।
