चना के घरेलू एवं वैश्विक बाजार परिदृश्य में बदलाव होने के आसार
07-Oct-2024 05:41 PM
मुंबई। सरकारी आकड़ों के अनुसार भारत में चना का उत्पादन पिछले साल के 123 लाख टन से घटकर चालू वर्ष में 110.40 लाख टन पर सिमट गया क्योंकि बिजाई क्षेत्र में गिरावट आने के साथ-साथ मौसम की हालत भी प्रतिकूल रही। अब दक्षिण-पश्चिम मानसून की अच्छी बारिश होने तथा बाजार भाव ऊंचा रहने से चना की बिजाई एवं पैदावार बढ़ने की उम्मीद है। वैसे चना के कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक इलाकों में वर्षा की कमी रहने की सूचना मिल रही है।
हालाँकि ऑस्ट्रेलिया में चालू वर्ष के दौरान पहले चना का उत्पादन तेजी से उछलकर 20 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया जा रहा था क्योंकि बिजाई क्षेत्र में वृद्धि के साथ मौसम के हालत भी अनुकूल थी। इससे पूर्व वहां 2023-24 में 4.91 लाख टन तथा 2022-23 में 5.41 लाख टन चना का उत्पादन आंका गया था। अगस्त-सितम्बर में मौसम खराब होने से अब सरकारी संस्था-अबारेस ने 2024-25 के वर्तमान सीजन में 1.35 लाख टन चना के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। जबकि रूस में 50 हजार टन की पैदावार हो सकती है। इस देशी चना की आपूर्ति मुख्यतः पाकिस्तान को हो रही है।
26 सितम्बर को नवम्बर-दिसंबर शिपमेंट के लिए ऑस्ट्रेलियाई देसी चना का निर्यात ऑफर मूल्य 800 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया जिसमें भारत तक पहुंच का परिवहन खर्च भी शामिल था और जो उससे पिछले सप्ताह के प्रचलित मूल्य 795 डॉलर प्रति टन से 1 प्रतिशत ऊंचा था। इसी तरह ऑस्ट्रेलियाई चना का बांग्लादेश पहुंच भाव 840 डॉलर प्रति टन तथा नेपाल तक पहुंच का मूल्य 890 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया जो गत चार सप्ताह के औसत मूल्य से 4 प्रतिशत कम रहा।
भारत में देसी चना का भाव औसतन 1-2 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिल्ली में 7925 रुपए प्रति क्विंटल तथा बीकानेर (राजस्थान) में 7725 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। घरेलू प्रभाग में चना की आपूर्ति में कुछ सुधार देखा गया। 21 से 27 सितम्बर वाले सप्ताह के दौरान इसकी आपूर्ति 62 प्रतिशत बढ़कर 29,741 टन पर पहुंच गयी। ऑस्ट्रेलिया में नवम्बर तक चना की सीमित आपोरती होगी और वहां आगामी नई फसल के लिए बाजार भाव लगभग स्थिर हो जाने की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया से उम्मीद के अनुरूप निर्यात नहीं होने रप आयातक देशों को नए बाजारों (निर्यातकों) की तलाश करनी पड़ेगी जिससे चना का भाव कुछ मजबूत रह सकता है।
