चीनी के घरेलू उत्पादन में उपयोग में बेहतर संतुलन की उम्मीद
26-Nov-2025 01:55 PM
नई दिल्ली। पिछले सीजन की तुलना में इस बार चीनी के घरेलू उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है जबकि उसका उपयोग लगभग स्थिर रहने की संभावना है। सरकार ने चीनी के निर्यात कोटे में 5 लाख टन का इजाफा कर दिया है जबकि एथनॉल निर्माण में इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में होगा।
कुल मिलाकर चीनी की मांग एवं आपूर्ति के बीच इस वर्ष बेहतर संतुलन बना रह सकता है और कीमतों में भी काफी हद तक स्थिरता रह सकती है। यदि चीनी के एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में अच्छी वृद्धि की जाती है और एथनॉल का दाम बढ़ाया जाता है तो उद्योग को काफी राहत मिल सकती है।
2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चीनी का सकल उत्पादन 340-345 लाख टन के बीच होने का अनुमान लगाया जा रहा है जिसमें से 36-37 लाख टन का इस्तेमाल एथनॉल निर्माण के लिए हो सकता है।
सरकार ने चीनी का निर्यात कोटा 2024-25 सीजन के 10 लाख टन से बढ़ाकर 2025-26 सीजन के लिए 15 लाख टन निर्धारित किया है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार की हालत को देखते हुए इस पूरे कोटे का शिपमेंट होने में संदेह है।
पिछले मार्केटिंग सीजन में 10 लाख टन के नियत कोटे के सापेक्ष चीनी का वास्तविक निर्यात 8 लाख टन तक भी नहीं पहुंच पाया था। हालांकि उद्योग ने इसके लिए निर्यात कोटा घोषित करने में हुई देरी को कारण माना है लेकिन सिर्फ यही एक कारण जिम्मेदार नहीं है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीनी अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर उपलब्ध थी जबकि भारतीय मिलर्स इसका मूल्य घटाने के लिए तैयार नहीं थे क्योंकि घरेलू मूल्य से कुछ ऊंचा रहने की उम्मीद है
क्योंकि ब्राजील एवं थाईलैंड जैसे शीर्ष निर्यातक देशों में उत्पादन बेहतर होने के आसार हैं। कुल मिलाकर चीनी का बैलेंस शीट इस बार संतुलित बना रहेगा और उद्योग की आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है।
