चना की घटती कीमतों पर अंकुश लगाने हेतु सरकारी खरीद की जरूरत पड़ेगी
17-Feb-2026 06:03 PM
अहमदाबाद। घरेलू एवं आयातित माल की उपलब्धता बढ़ने तथा स्टॉकिस्टों एवं दाल मिलर्स की मांग कमजोर रहने से चना की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है और पिछले कुछ सप्ताहों से इसमें नरमी का माहौल बना हुआ है। नए चने की आवक धीरे-धीरे जोर पकड़ने की संभावना है इसलिए कीमतों में और भी गिरावट आ सकती है। विदेशों से आयातित चना का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे है। नीचे दाम पर भी इसकी खरीदारी कम हो रही है।
कर्नाटक, महाराष्ट्र एवं गुजरात जैसे महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों की कुछ मंडियों में नए चने की आपूर्ति आरंभ हो चुकी है और वहां इसका भाव घटकर एमएसपी से नीचे आ गया है। व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक बिजाई क्षेत्र में वृद्धि एवं मौसम अनुकूल होने से इस वर्ष चना का घरेलू उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है इसलिए खरीदार इसकी लिवाली में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं। चना की घटती कीमतों पर अंकुश तभी लग सकेगा जब इसकी जोरदार सरकारी खरीद आरंभ होगी।
इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के सचिव का कहना है कि पिछले पंद्रह दिनों के अंदर चना के दाम में 10-15 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। सरकारी खरीद आरंभ होने में देर है और मार्केट अच्छी आपूर्ति का भार संभालने में असमर्थ हैं। चना का थोक मंडी भाव फिलहाल 5400-5500 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है।
आगामी समय में इसके नए माल की जोरदार आवक पहले महाराष्ट्र में और फिर मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में होने लगेगी। इससे कीमतों में आगे और भी गिरावट आ सकती है। कर्नाटक, गुजरात तथा उत्तर प्रदेश का नया चना भी बाजार पर दबाव डाल सकता है।
चना दाल की मांग कमजोर है। बंदरगाहों पर विदेशों से आयातित चना का खर्च 5300 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास बैठ रहा है। आयातित चना की क्वालिटी अच्छी है इसलिए व्यापारी एवं मिलर्स उसकी खरीद कर रहे हैं जबकि मंडियों में खरीदारी कम हो रही है।
एसोसिएशन के अनुसार मुम्बई बंदरगाह पर तंजानिया से आयातित चना का भाव 5300 रुपए तथा ऑस्ट्रेलिया से आने वाले चने का दाम 5425 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। इसका भाव गुजरात के मूंदड़ा बंदरगाह पर 5350 रुपए एवं कांडला पोर्ट पर 5375 रुपए प्रति क्विंटल है।
