चीनी के निर्यात के लिए वैश्विक बाजार की हालात अनुकूल नहीं
19-Feb-2026 05:39 PM
मुम्बई। हालांकि केन्द्र सरकार ने कुछ शर्तों के साथ 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए चीनी का निर्यात कोटा 15 लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन निर्धारित कर दिया है लेकिन उद्योग- व्यापार समीक्षकों का कहना है कि वैश्विक बाजार की हालत भारत से चीनी के निर्यात के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है।
दुनिया के सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश-ब्राजील के मध्य दक्षिणी भाग में आगामी अप्रैल माह से गन्ना की क्रशिंग एवं चीनी के उत्पादन का नया सीजन आरंभ होने वाला है और थोड़ी-बहुत गिरावट आने के बावजूद चीनी का कुल उत्पादन 400 लाख टन के आसपास होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इसके अलावा थाईलैंड, चीन तथा यूरोपीय संघ में भी चीनी का उत्पादन बेहतर होने की संभावना व्यक्त की जा रही है जिससे वैश्विक बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी सुगम बनी रहेगी और कीमतों पर दबाव कायम रह सकता है।
हालांकि महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में चीनी का एक्स फैक्टरी बिक्री मूल्य घटकर काफी नीचे आया है लेकिन फिर भी निर्बाध निर्यात सुनिश्चित करने के स्तर तक इसमें कमी नहीं आई है। चीनी का वैश्विक बाजार भाव नरम बना हुआ है।
इधर सरकार ने नियम बनाया है कि 5 लाख टन के अतिरिक्त निर्यात कोटे से चीनी की मात्रा का आवंटन केवल उसी इच्छुक मिलों को किया जाएगा जो 15 लाख टन के पूर्व नियत कोटे में से आवंटित चीनी के कम से कम 70 प्रतिशत भाग का शिपमेंट जून 2026 तक करने में सफल होंगी। अतिरिक्त कोटे का निर्यात भी 30 सितंबर 2026 तक करना होगा। उद्योग को लगता है कि चीनी निर्यात के लिए शायद इस कोटे की जरूरत नहीं पड़ेगी।
