चावल की बहुतायत से कीमतों पर असर
25-Dec-2025 07:42 PM
नई दिल्ली। बीते खरीफ सीजन में धान का रकबा तेजी से उछलकर 441 लाख हेक्टेयर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था जिससे इसका शानदार उत्पादन हुआ है।
मगर दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन के दौरान कुछ इलाकों में अत्यन्त जोरदार बारिश के कारण भयंकर बाढ़ नहीं आई होती तो उत्पादन में और भी वृद्धि हो सकती थी।
शानदार उत्पादन एवं क्रय केन्द्रों पर भारी आवक होने से धान की सरकारी खरीद भी जोर-शोर से हो रही है। इसके फलस्वरूप केन्द्रीय पूल में धान-चावल का स्टॉक तेजी से बढ़ रहा है।
घरेलू बाजार में भी चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी हद तक सुगम बनी हुई है जिससे इसकी कीमतों में ठहराव आ गया है।
निर्यातकों को इससे राहत मिल रही है क्योंकि एक तो उसे सस्ते दाम पर निर्यात उद्देश्य के लिए पर्याप्त मात्रा उसे चावल का स्टॉक प्राप्त हो रहा है और दूसरे रुपए की विनिमय दर भी घटकर काफी नीचे आई गई है जिससे व्यापारियों को चावल का निर्यात ऑफर मूल्य प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
रबी कालीन धान का रकबा भी गत वर्ष से आगे है जिससे इसके उत्पादन में इजाफा हो सकता है। वैश्विक चावल निर्यात बाजार की हालत धीरे-धीरे सामान्य होती जा रही है
लेकिन बेहतर निर्यात प्रदर्शन के बावजूद चावल के घरेलू बाजार मूल्य में भारी तेजी आने की उम्मीद नहीं है क्योंकि इसका पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
