चावल की सरकारी खरीद 5 प्रतिशत बढ़कर 416 लाख टन के करीब पहुंची
04-Feb-2025 10:57 AM
नई दिल्ली । आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान खरीफ मार्केटिंग सीजन में अक्टूबर 2024 से जनवरी 2025 के चार महीनों के दौरान केन्द्रीय पूल के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा कुल मिलाकर 415.91 लाख टन चावल (इसके समतुल्य धान) की खरीद की गई जो 2023-24 सीजन की समान अवधि की खरीद 397.47 लाख टन से 4.6 प्रतिशत अधिक रही।
ध्यान देने की बात है कि सरकार ने 2024-25 के मार्केटिंग सीजन हेतु अखिल भारतीय स्तर पर चावल की खरीद का लक्ष्य 492.11 लाख टन से बढ़कर 492. 61 लाख टन नियत कर दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि अब तक खरीदे गए चावल का स्टॉक न केवल सामान्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है बल्कि जलवायु परिवर्तन सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न होने वाली अप्रत्याशित समस्या को दूर करने में भी सक्षम है।
लेकिन केन्द्र सरकार को चावल के इस अत्यन्त विशाल स्टॉक के सुरक्षित भंडारण एवं प्रबंधन में कठिनाई हो सकती है।
हालांकि केन्द्रीय पूल से चावल की तेज निकासी का भरपूर प्रयास किया जा रहा है लेकिन यह देखना आवश्यक होगा कि सरकार को इसमें कितनी सलफता मिलती है।
समीक्षकों के मुताबिक धान चावल की अच्छी खरीद होना किसानों के हित में है। खाद्य निगम द्वारा प्रांतीय स्तर की सहयोगी एजेंसियों द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विशाल मात्रा में धान खरीदे जाने से ऋण समुदाय को अच्छी आमदनी प्राप्त हुई है।
लेकिन इसके साथ ही सरकार को चावल की स्थायी निकासी नीति भी बनानी होगी ताकि अधिशेष स्टॉक को उपयोग में लाया जा सके।
चावल की सरकारी खरीद विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में वितरण की जरूरत से अधिक हो रही है। खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) तथा भारत ब्रांड नाम के तहत चावल बेचने की स्कीम सीमित प्रभाव वाली कोशिश है क्योंकि घरेलू बाजार में चावल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और इसका दाम भी स्थिर हो गया है।
