चावल निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने हेतु सरकारी प्रोत्साहन की जरूरत

07-Jan-2026 05:56 PM

नई दिल्ली। वैश्विक चावल निर्यात बाजार में 40-42 प्रतिशत की भागीदारी रखने वाला भारत दुनिया में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत से संसार के 170 से अधिक देशों को लगभग 2.01 लाख टन चावल का निर्यात किया गया।

केन्द्र सरकार प्रत्येक वर्ष धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी करती है जिससे चावल का घरेलू बाजार भाव ऊंचा हो जाता है।

इसके साथ-साथ निर्यातकों को बंदरगाहों तक अपना उत्पाद पहुंचाने के लिए भारी-भरकम परिवहन खर्च उठाना पड़ता है और निर्यात शिपमेंट से पूर्व तथा बाद में भी ऊंचे ब्याज पर बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से ऋण लेना पड़ता है।

इससे उसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता प्रभावित होती है। यदि सरकार इन समस्यायों को दूर करने हेतु नीतिगत सहयोग-समर्थन एवं प्रोत्साहन प्रदान करे तो चावल निर्यातकों को काफी राहत मिल सकती है।

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने सरकार से टैक्स इंसेटिव ब्याज पर सब्सिडी तथा माल भाड़ा के लिए सपोर्ट देने का आग्रह किया है ताकि निर्यात क्षेत्र की प्रतिस्पर्धी क्षमता मजबूत हो सके और निर्यात की निरंतरता एवं गतिशीलता कायम रह सके।

इसके तहत निर्यात ऋण पर ब्याज दर में 4 प्रतिशत की छूट तथा सड़क एवं रेल मार्ग से माल भाड़ा के लिए 3 प्रतिशत की रियायत देने की मांग की गई है।