छोटी इलायची का अगला उत्पादन बेहतर होने के आसार
12-May-2025 07:44 PM
इडुक्की। मानसून पूर्व की नियमित रूप से अच्छी बारिश होने तथा मौसम की हालत काफी हद तक फसल के लिए अनुकूल रहने से छोटी (हरी) इलायची का अगला उत्पादन बेहतर होने के आसार हैं बशर्ते आगे भी स्थिति अनुकूल बनी रहे और फसल को किसी गंभीर प्राकृतिक आपदा का सामना न करना पड़े।
देश के सुदूर दक्षिणी राज्य केरल और तमिलनाडु से छोटी इलायची का उत्पादन होता है और इन दोनों ही राज्यों के बागानी इलाकों में मार्च से ही रुक रूककर बारिश हो रही है जबकि धूप भी निकल रही है।
इससे इलायची की लताओं में अच्छे फूल और दाने लगे हैं। अगले महीने से दाने परिपक्व होने लगेंगे जिससे जुलाई से इसकी तुड़ाई-तैयारी जोर पकड़ सकती है।
पिछले साल प्रतिकूल मौसम के कारण न केवल फसल की हालत कमजोर रही बल्कि इलायची की तुड़ाई-तैयारी भी देर से शुरू हुई। जून से ही मानसून की बारिश आरंभ हो जाती है और दक्षिण-पश्चिम मानसून सबसे पहले केरल में ही पहुंचता है।
यदि वर्षा का सिलसिला जारी रहा तो इलायची की फसल को आगे भी फायदा होगा क्योंकि इसकी तुड़ाई-तैयारी दो से तीन चरणों में होती है जबकि कभी-कभी तुड़ाई चौथे दौर तक में पहुंच जाती है।
2024-25 के मार्केटिंग सीजन का अंतिम दौर चल रहा है इसलिए नीलामी केन्द्रों में उसका ध्यान आगामी फसल पर केन्द्रित है। 30 अप्रैल को हुई नीलामी में 15,948 किलो इलायची की आपूर्ति हुई थी और इसका औसत मूल्य 2293.52 रुपए प्रति किलो दर्ज किया गया था।
इसके मुकाबले पिछले सप्ताह के दौरान आयोजित नीलामी में आवक कुछ कम यानी 15,631 किलो होने के बावजूद पर्याप्त लिवाली का समर्थन नहीं मिलने से इसका दाम गिरकर 1972.75 रुपए प्रति किलो रह गया।
लम्बे समय के बाद यह पहला अवसर है जब छोटी इलायची का औसत नीलामी मूल्य घटकर 2000 रुपए प्रति किलो से नीचे आया है। हालांकि उत्तरी भारत में लग्नसरा एवं मांगलिक उत्सवों का सीजन जारी है लेकिन यहां खपत केन्द्रों में इसका समुचित स्टॉक भी उपलब्ध है।
दिसावरी व्यापारियों द्वारा नीलामी केन्द्रों में हरी इलायची की खरीद में कम सक्रियता दिखाई जा रही है जिससे निकट भविष्य में इसके दाम में जोरदार तेजी आने की उम्मीद नहीं है। नई फसल की आवक शुरू होने में कुछ देर है और तब तक बाजार काफी हद तक सामान्य स्थिति में रहने की उम्मीद है।
