छोटी इलायची की घरेलू एवं निर्यात मांग में सुधार आने के आसार
18-Nov-2024 04:10 PM
इडुक्की । घरेलू प्रभाग में लग्नसरा का सीजन जारी रहने से छोटी इलायची की मांग एवं खपत में कुछ बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद की जा रही है। उधर अन्तर्राष्ट्रीय बाजार और खासकर खाड़ी क्षेत्र के मुस्लिम बहुल देशों में रमजान की मांग निकलने वाली है।
इस बार दोनों शीर्ष उत्पादक एवं निर्यातक देशों- ग्वाटेमाला तथा भारत में इलायची के उत्पादन में 40-50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आने की आशंका है जिससे वैश्विक बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल रह सकती है।
ग्वाटेमाला की इलायची का भाव ऊंचा चल रहा है जिससे प्रमुख आयातक देशों में भारतीय इलायची की मांग बढ़ने के आसार हैं। भारतीय इलायची की क्वालिटी ग्वाटेमाला से बेहतर होती है इसलिए अक्सर इसका दाम भी ऊंचा रहता है लेकिन इस बार स्थिति विपरीत देखी जा रही है। ग्वाटेमाला के उत्पादक नीचे दाम पर अपनी इलायची बेचने के लिए तैयार नहीं है।
केरल के निकासी केन्द्रों में छोटी इलायची का औसत मूल्य तेज होता जा रहा है क्योंकि दिसावरी व्यापारियों तथा स्थानीय डीलर्स के साथ निर्यातक भी इसकी खरीद में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
7 नवम्बर को इसका नीलामी औसत मूल्य 2503 रुपए प्रति किलो था जो अगली नीलामी में बढ़कर 2721 रुपए प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया। नीलामी केन्द्रों में औसतन 70 टन माल की आवक हो रही है और इसकी खरीद-बिक्री की गति भी बेहतर देखी जा रही है।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र के देशों में रमजान की जोरदार मांग निकलने पर भारतीय इलायची का भाव बढ़कर 3000 रुपए प्रति किलो से आगे निकल सकता है और बहुत संभव है कि यह ऊपर में 3500 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाए।
वैसे अत्यन्त ऊंचे मूल्य पर इसकी घरेलू मांग प्रभावित हो सकती है। कुल मिलाकर फरवरी-मार्च तक छोटी इलायची का भाव घरेलू प्रभाग में मजबूत रहने की उम्मीद है।
