एमपी एवं राजस्थान में अत्यधिक बारिश से फसलों की बिजाई की गति धीमी

05-Aug-2025 03:14 PM

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश (एमपी) तथा राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्यों में इस बार शुरूआती चरण के दौरान खरीफ फसलों की बिजाई की गति काफी तेज थी लेकिन बाद में मानसून की अत्यधिक बारिश होने से खेतों में पानी भर जाने के कारण बिजाई की रफ्तार सुस्त पड़ गई। हालांकि इस वर्षा से धान की रोपाई में सहायता मिल रही है लेकिन दलहन-तिलहन, छोटे अनाज एवं कपास की बिजाई में बाधा पड़ रही है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष की तुलना में इस बार 1 अगस्त तक मोटे अनाजों का रकबा 2.2 प्रतिशत तथा दलहनों का क्षेत्रफल 0.3 प्रतिशत पीछे रह गया।

इसका प्रमुख कारण सामान्य औसत की तुलना में राजस्थान में 81 प्रतिशत तथा मध्य प्रदेश में 47 प्रतिशत अधिक वर्षा होना है। इससे वहां खेतों में पानी भर गया।

ज्ञात हो कि राजस्थान खरीफ कालीन दलहनों एवं मोटे अनाजों का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य माना जाता है। मध्य प्रदेश भी इसका एक अग्रणी उत्पादक राज्य है।

2024-25 के खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर दलहनों एवं मोटे अनाजों के कुल उत्पादन क्षेत्र में इन दोनों का संयुक्त योगदान 40 प्रतिशत के करीब रहा था। 

दक्षिण-पश्चिम मानसून के दूसरे हाफ में यानी अगस्त-सितम्बर के दौरान भी इन दोनों राज्यों में खरीफ फसलों की बिजाई जारी रहती है लेकिन इस बार स्थिति अनुकूल नहीं होने से किसानों को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।

इतना ही नहीं बल्कि कई इलाकों में अत्यधिक बारिश एवं बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान की आशंका भी बढ़ती जा रही है। सरकार ने मोटे अनाजों एवं दलहनों के उत्पादन क्षेत्र का महत्वाकांक्षी लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाएगा मगर उसके बाद अत्यन्त मूसलाधार वर्षा का दौर शुरू हो गया और फिर बिजाई की रफ्तार सुस्त पड़ने लगी। 

अच्छी वर्षा से धान की रोपाई में काफी सहायता मिल रही है और इसका उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से काफी आगे चल रहा है। बांधों-जलाशयों में भी पानी का स्तर ऊंचा हो गया है।

सरकार ने इस बार धान के उत्पादन क्षेत्र का लक्ष्य 440 लाख हेक्टेयर नियत किया है जिसके 72.6 प्रतिशत भाग में अब तक रोपाई पूरी हो चुकी है। धान का क्षेत्रफल गत वर्ष से 16.7 प्रतिशत आगे है राष्ट्रीय स्तर पर 4 अगस्त तक सामान्य औसत से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।