एथनॉल उत्पादन के लिए चावल के आवंटित कोटे के 54 प्रतिशत भाग की बिक्री
14-Oct-2025 04:13 PM
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को 2024-25 के मौजूदा एथनॉल मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान अभी तक एथनॉल निर्माण के लिए कुल आवंटित कोटे के केवल 54 प्रतिशत चावल की बिक्री करने में सफलता हासिल हो सकी है
जबकि मार्केटिंग सीजन इस माह के अंत में समाप्त होने वाला है। इससे साफ संकेत मिलता है कि जैव ईंधन निर्माण में चावल के अधिशेष सरकारी स्टॉक के उपयोग को बढ़ाने में ज्यादा कामयाबी नहीं मिल रही है।
उल्लेखनीय है कि चालू मार्केटिंग सीजन के लिए एथनॉल निर्माण हेतु सरकार ने कुल 52 लाख टन चावल का स्टॉक आवंटित किया है जिसमें से केवल लगभग 28 लाख टन या 54 प्रतिशत भाग की ही बिक्री संभव हो सकी है।
एथनॉल निर्माताओं को रियायती मूल्य पर चावल दिया जाता है। केन्द्र सरकार अपने विशाल अधिशेष स्टॉक की निकासी के लिए एथनॉल निर्माण में चावल के उपयोग को बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
केन्द्रीय पूल में न केवल चावल का रिकॉर्ड स्टॉक मौजूद है बल्कि आगामी महीनों में इसके लगातार बढ़ते जाने की संभावना भी है। लेकिन चावल के उठाव की गति काफी धीमी देखी जा रही है जबकि 2024-25 का मार्केटिंग सीजन को समाप्त होने में केवल दो सप्ताह का समय बाकी रह गया है। खाद्य निगम के अधिकारियों का मानना है कि 2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन में एथनॉल निर्माण के लिए 29 लाख टन चावल की बिक्री हो सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार प्रक्रियागत विलम्ब के कारण चावल के उठाव की रफ्तार सुस्त है। एक तो चावल आवंटन की घोषणा देर से की गई और दूसरे, तेल विपणन कंपनियों द्वारा एथनॉल के लिए आवंटन पत्र को धीरे-धीरे जारी किया गया।
इससे डिस्टीलर्स को चावल के स्टॉक का उठाव करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका। समीक्षकों के मुताबिक नवम्बर 2025 से आरंभ होने वाले नए मार्केटिंग सीजन में चावल का उठाव बेहतर हो सकता है।
एक और खास बात यह है कि डिस्टीलर्स एथनॉल निर्माण के लिए चावल के बजाए मक्का के उपयोग को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि वह ज्यादा लाभदायक साबित होता है।
लेकिन सरकार ने अनाज से निर्मित एथनॉल में चावल पर आधारित एथनॉल की भागीदारी 40 प्रतिशत से कम नहीं रखने का नियम लागू कर रखा है इसलिए इसका इस्तेमाल नियमित रूप से होता रहेगा।
