फोर्टिफाइड चावल योजना की अवधि दिसम्बर 2028 तक बढ़ाई गई
10-Oct-2024 08:33 PM
नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा कानून तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत फोर्टिफाइड चावल के वितरण को दिसम्बर 2028 तक बरकरार रखने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है जिस पर सरकार को कुल मिलाकर 17,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
वर्ष 2022 में इस कार्यक्रम को शुरू किया गया था। फोर्टिफाइड चावल का निर्माण खाद्य सुरक्षा नियामक संस्था- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप होता है और इसमें तीन सूक्ष्म पौष्टिक अवयवों- आयरन, फोलिक एसिड तथा विटामिन बी 12 का मिश्रण किया जाता है।
इस फोर्टिफाइड चावल को सामान्य श्रेणी के चावल के साथ मिलाकर उसका वितरण किया जाता है। समझा जाता है कि कुपोषण तथा खून की कमी जैसी समस्याओं को दूर करने में यह फोर्टिफाइड चावल महत्पूर्ण भूमिका निभाता है हालांकि इसमें कुछ जोखिम भी है लेकिन उसमे मुकाबले इससे होने वाला फायदा बहुत अधिक है।
दुनिया के 140 देशों में यह फोर्टिफिकेशन प्रोग्राम लागू हो चुका है। फोर्टिफाइड चावल से महिलाओं में रक्त की कमी का संकट दूर किया जा सकता है।
यह योजना पूरी तरह केन्द्र द्वारा प्रयोजित है और इसका मुफ्त में वितरण किया जा रहा है। इसकी आपूर्ति पर 17,082 करोड़ रुपए का खर्च बैठने का अनुमान है। सरकार कुपोषण की समस्या भी दूर करने का प्रयास कर रही है।
