गेहूं के सम्पूर्ण निर्यात कोटे का शिपमेंट होना कठिन

19-Feb-2026 05:25 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने चालू वर्ष के लिए 25 लाख टन गेहूं के निर्यात का कोटा नियत किया है लेकिन घरेलू एवं वैश्विक बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस सम्पूर्ण कोटे का शिपमेंट होना मुश्किल लगता है। इसमें मसका   क्वालिटी का कम और कीमत का ज्यादा है।

अभी तक गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2425 रुपए प्रति क्विंटल है जबकि नए गेहूं के लिए यह 160 रुपए बढ़कर 2585 रुपए प्रति क्विंटल हो जाएगा। राजस्थान में इसके ऊपर 150 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की गई है।

इसके फलस्वरूप व्यापारियों / निर्यातकों को काफी ऊंचे दाम पर गेहूं की खरीद करनी पड़ेगी जिससे वैश्विक निर्यात बाजार और खासकर दूरस्थ देशों में उसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता ऋणात्मक हो जाएगी। दक्षिण-एशिया के कुछ पड़ोसी देशों में भारतीय गेहूं का थोड़ा- बहुत निर्यात हो सकता है क्योंकि इससे आयातको को परिवहन खर्च में बचत होगी। 

मोटे अनुमान के अनुसार 2585 रुपए प्रति क्विंटल के एमएसपी पर खरीदे गए गेहूं का निर्यात ऑफर मूल्य वैश्विक बाजार भाव से काफी ऊंचा रखना पड़ेगा और इसका शिपमेंट खर्च कम से कम 45 डॉलर प्रति टन ऊंचा रह सकता है। भारतीय किसान सामान्य औसत क्वालिटी का गेहूं एमएसपी से नीचे दाम पर बेचना पसंद नहीं करेगा। 

सरकार ने गेहूं उत्पादों का निर्यात कोटा भी 5 लाख टन से बढ़कर 10 लाख टन नियत कर दिया है। मिलर्स / प्रोसेसर्स को भी ऊंचे दाम पर किसानों से गेहूं की खरीद करनी पड़ेगी जिससे गेहूं उत्पादों का निर्यात ऑफर मूल्य स्वाभाविक रूप से बढ़ जाएगा। अब सबका ध्यान इस बात पर केन्द्रित है कि सरकार का अगला कदम कौन सा होगा।