गेहूं का वर्तमान मूल्य भी निर्यात के लिए उपयुक्त नहीं
18-Feb-2026 04:46 PM
इंदौर। बेशक सरकार ने व्यापारियों / निर्यातकों को 25 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी है लेकिन घरेलू बाजार में प्रचलित मौजूदा मूल्य स्तर इसके अनुबंध एवं शिपमेंट के लिए अनुकूल नहीं माना जा रहा है।
राजस्थान, गुजरात एवं मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से कांडला बंदरगाह तक डिलीवरी के लिए गेहूं का खर्च 25,200-25,500 रुपए प्रति टन के बीच बैठ रहा है जो विदेशी मुद्रा में 285-288 डॉलर प्रति टन के समतुल्य है। यदि सामुद्रिक परिवहन (शिपमेंट) खर्च 20 डॉलर प्रति टन भी इसमें जोर दिया जाए तो मध्य पूर्व एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए इसकी पहुंच का कुल खर्च 305-508 डॉलर प्रति टन हो जाएगा।
इसी तरह अगर उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के गेहूं का शिपमेंट भारत के विशाखपट्नम बंदरगाह से किया जाए तो इसका खर्च 300-310 डॉलर प्रति टन बैठेगा। इसके मुकाबले वैश्विक बाजार में गेहूं का भाव 260 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रहा है। हालांकि मध्य-पूर्व के देशों में भारत के गेहूं को पसंद किया जाता है लेकिन कीमतों में 45-48 डॉलर प्रति टन का भारी अंतर होने से यह महंगा हो जाएगा।
रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष का कहना है कि घरेलू बाजार में गेहूं का भाव मौजूद स्तर से 2500-3000 रुपए प्रति टन तक नरम पड़ने के बाद ही मध्य-पूर्व के देशों में भारत से निर्यात लाभप्रद साबित हो सकता है।
आगामी महीनों में भी भारतीय गेहूं वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पाएगा क्योंकि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचना पसंद नहीं करेंगे जबकि यह समर्थन काफी ऊंचा 2585 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है।
इससे भारतीय गेहूं काफी महंगा हो जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में संलग्न कंपनियां मार्च के दूसरे हाफ के शिपमेंट के लिए गेहूं का ऑफर 286-290 डॉलर प्रति टन के बीच दे रही हैं। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार 11.5 प्रतिशत प्रोटीन वाले भारतीय गेहूं का भाव 20 डॉलर प्रति टन ऊंचा है।
