गेहूं कारोबार के लिए दीर्घकालीन नीति बनाने की जरूरत पर जोर

17-Feb-2026 04:53 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा हाल ही में 25 लाख टन गेहूं के व्यापारिक निर्यात की स्वीकृति दी गई है और साथ ही साथ गेहूं उत्पादों का निर्यात कोटा भी 5 लाख टन बढ़ाकर 10 लाख टन नियत किया गया है। इससे उद्योग- व्यापार क्षेत्र को  कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं गेहूं कारोबार के जाने-माने विशेषज्ञ-नवनीत चितलांगिया ने सरकार के निर्यात सम्बन्धी निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि विभिन्न मोर्चे पर स्थायी, दीर्घकालीन एवं सकारात्मक नीति का निर्माण एवं किर्यान्वयन की ज़रूरत है ताकि उद्योग- व्यापार क्षेत्र को अपनी रणनीति बनाने में आसानी हो सके। 

फेडरेशन के अध्यक्ष का कहना है कि इस बार गेहूं का बिजाई क्षेत्र 2 प्रतिशत बढ़ा है और कुछ सीमित इलाकों को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल की हालत सामान्य या संतोषजनक है। इसके फलस्वरूप पिछले साल की भांति चालू वर्ष के दौरान भी गेहूं का शानदार घरेलू उत्पादन होने की उम्मीद है।

भारतीय खाद्य निगम के पास यानी केन्द्रीय पूल में गेहूं का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है और सरकारी आंकड़ों में बताया गया है कि प्राइवेट क्षेत्र के पास भी गत वर्ष से करीब 30 लाख टन अधिक गेहूं का स्टॉक उपलब्ध है। मंडियों में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की समुचित आवक हो रही है और कीमतों में काफी हद तक नरमी का माहौल बना हुआ है। 

नवनीत चितलांगिया के अनुसार गेहूं पर लागू भंडारण सीमा समाप्त हो चुकी है और निकट भविष्य में इसे दोबारा लगाए जाने की संभावना नहीं है। सरकार का मानना है कि 1 अप्रैल 2026 को जब गेहूं खरीद का नया मार्केटिंग सीजन आरंभ होगा तब उसके पास 182 लाख टन का अधिशेष स्टॉक मौजूद रह सकता है। 2025-26 के रबी सीजन हेतु गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2585 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है। इस ऊंचे मूल्य पर उद्योग-व्यापार क्षेत्र के लिए गेहूं का कारोबार करना आसान नही होगा। 

जहां तक गेहूं एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात की पैरिटी का सवाल है तो इस सम्बन्ध में फेडरेशन के अध्यक्ष ने कहा है कि बांग्ला देश एवं नेपाल जैसे सीमावर्ती देशों में निर्यात पर कुछ 'पड़ता' बैठ सकता है लेकिन मध्य-पूर्व एशिया सहित अन्य बाजारों में निर्यात करने में कुछ समय लग सकता है।

आगामी महीनों में जब नए गेहूं की जोरदार आपूर्ति होगी तब इसकी कीमतों में एमएसपी के सापेक्ष 250-300 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आने पर ही प्राइवेट क्षेत्र को इसकी खरीद का प्रोत्साहन मिल सकता है।