गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति देने से सभी पक्षों को होगा फायदा

17-Nov-2025 03:36 PM

नई दिल्ली। चालू माह के आरंभ में सरकार के पास 300 लाख टन से अधिक गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद था जिसे देखते हुए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने 12 नवम्बर से खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत मिलर्स-प्रोसेसर्स को इसकी बिक्री भी आरंभ कर दी।

इधर प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण थोक मंडियों में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम होने से गेहूं का भाव सामान्य उतार-चढ़ाव के साथ एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर बना हुआ है। 

सरकारी गेहूं की खरीद में मिलर्स- प्रोसेसर की दिलचस्पी कम देखी जा रही है क्योंकि इसका न्यूनतम आरक्षित मूल्य (रिजर्व प्राइस) आकर्षक या ज्यादा लाभप्रद नहीं है।

स्टॉक सीमा लागू होने से मंडियों में गेहूं की अच्छी आपूर्ति हो रही है। किसानों को भी गेहूं का दाम उम्मीद के अनुरूप नहीं मिल रहा है।

व्यापारियों-स्टाकिस्टों को न्यूनतम मार्जिन पर इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का कारोबार करना पड़ रहा है। घरेलू बाजार में गेहूं एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों की प्रचुरता है। 

शीर्ष उद्योग संस्था- रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया बार-बार सरकार से गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति देने का आग्रह कर रहा है।

उसका कहना है कि सामान्यतः गेहूं उत्पादों के निर्यात को पूरी तरह नियंत्रण मुक्त किया जाना चाहिए और तत्काल यदि यह संभव न हो तो आरम्भिक चरण में कम से कम 10 लाख टन के निर्यात का कोटा जारी किया जाए।

इससे मिलर्स को कुछ राहत मिलेगी और घरेलू बाजार भाव पर भी प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। गेहूं की जोरदार बिजाई अभी जारी है और किसान इसका क्षेत्रफल बढ़ाने का प्रयास कर सकते है।