गुजरात की वजह से कपास का घरेलू उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से पीछे

05-Aug-2025 05:56 PM

नई दिल्ली। देश के सबसे प्रमुख रूई उत्पादक राज्य- गुजरात में किसानों द्वारा मूंगफली एवं सोयाबीन की खेती पर विशेष जोर दिए जाने से कपास के बिजाई क्षेत्र में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।

राज्य कृषि विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सीजन के दौरान गुजरात में 4 अगस्त तक कपास का कुल उत्पादन क्षेत्र घटकर 20.35 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 23.35 लाख हेक्टेयर से 13 प्रतिशत या 3 लाख हेक्टेयर कम है। गुजरात में इस बार कपास का सामान्य औसत क्षेत्रफल 25.34 लाख हेक्टेयर आंका गया है। 

हालांकि कर्नाटक, तेलंगाना एवं राजस्थान जैसे प्रांतों में कपास के उत्पादन क्षेत्र में इजाफा हुआ है लेकिन फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर इसका कुल बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 108.43 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 1 अगस्त 2025 को 105.87 लाख हेक्टेयर रह गया।

राजकोट के एक व्यापारी का कहना है कि गुजरात के कई किसान इस बार कपास के बजाए मूंगफली की तरफ मुड़ गए। यद्यपि केन्द्र सरकार ने दोनों फसलों के न्यूतनम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी की है मगर किसानों को मूंगफली की खेती ज्यादा लाभदायक प्रतीत हो रही है। कपास का सीजन लम्बा चलता है जबकि किसान मूंगफली की फसल जल्दी काटकर दूसरी फसल की बिजाई कर सकते हैं। 

देश में कपास की लगभग 90 प्रतिशत बिजाई पूरी हो चुकी है और इसकी प्रकिया अभी जारी है। उद्योग समीक्षकों के अनुसार चालू सीजन के दौरान कपास का कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से लगभग बराबर ही रहने की उम्मीद है।

महाराष्ट्र में कपास का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से और पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से पीछे चल रहा है। लेकिन आंध्र प्रदेश में आगे हो गया है। तेलंगाना में 30 जुलाई तक कपास का रकबा 40.66 लाख एकड़ से बढ़कर 43.28 लाख एकड़ पर पहुंच गया। लेकिन यह सामान्य औसत क्षेत्रफल 48.93 लाख एकड़ से काफी पीछे है।

कर्नाटक में कपास का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 6.40 लाख हेक्टेयर से 17 प्रतिशत बढ़कर इस बार 7.50 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। कपास की फसल के लिए आमतौर पर मौसम एवं वर्षा की हालत अनुकूल बनी हुई है। आगे का मौसम सामान्य रहने की उम्मीद है।