गुजरात में भी खरीफ फसलों का रकबा गत वर्ष से पीछे

08-Sep-2026 05:58 PM

अहमदाबाद। महाराष्ट्र एवं राजस्थान सहित कुछ अन्य प्रांतों की भांति गुजरात में भी खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से पीछे चल रहा है। वैसे वहां बिजाई क्षेत्र में कमी का अंतर घटकर अब महज 1.61 लाख हेक्टेयर के करीब रह गया है जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि हाल के सप्ताहों के दौरान राज्य में खरीफ फसलों की बिजाई में काफी सुधार आया है। 

हालांकि अनाजी फसलों के संवर्ग में गुजरात में पिछले वर्ष के मुकाबले मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान धान के उत्पादन क्षेत्र में थोड़ी बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन ज्वार, बाजरा एवं मक्का का रकबा कुछ घट गया है। इसके फलस्वरूप अनाजी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के लगभग बराबर हो गया है।

दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र कुल मिलाकर गत वर्ष से 11 हजार हेक्टेयर आगे हो गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि वहां अरहर (तुवर) एवं उड़द के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है जबकि मूंग का रकबा घट गया है। गुजरात में जुलाई-अगस्त के दौरान मानसून की अच्छी वर्षा हुई जिससे किसानों को विभिन्न फसलों की बिजाई की रफ्तार बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल गया। खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के काफी करीब पहुंच गया है जबकि फसलों की बिजाई भी अंतिम चरण में पहुंच गई है।

मूंगफली की कम बिजाई होने के कारण खरीफ कालीन तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से 1.82 लाख हेक्टेयर पीछे रह गया। वहां अरंडी का बिजाई क्षेत्र भी पीछे है। ध्यान देने की बात है कि गुजरात मूंगफली एवं अरंडी के साथ-साथ कपास का भी सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है। तिल की खेती भी कम क्षेत्रफल में हुई है मगर सोयाबीन का क्षेत्रफल कुछ बढ़ गया है। इसी तरह कपास के रकबे में भी कुछ सुधार आया है मगर ग्वार का बिजाई क्षेत्र घट गया है।