कमजोर बारिश से खरीफ फसलों को अधिक खतरा
08-Sep-2026 05:19 PM
नई दिल्ली। हालांकि खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 1104 लाख हेक्टेयर से 17.70 लाख हेक्टेयर घटकर इस बार 1086.30 लाख हेक्टेयर रह गया है जिसमें धान, मक्का, रागी, अरंडी एवं मूंग का विशेष योगदान है लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बिजाई क्षेत्र में गिरावट के मुकाबले खरीफ फसलों का उत्पादन कमजोर मानसून से ज्यादा प्रभावित हो सकता है।
जुलाई-अगस्त में देश के अधिकांश भागों में लगभग सामान्य बारिश हुई लेकिन जून के कमजोर मानसून के कारण कुल वर्षा सामान्य औसत से करीब 13 प्रतिशत कम रही। चालू माह (सितम्बर) के शुरुआती 7 दिनों में भी देश के दो दर्जन से अधिक प्रांतों में अच्छी वर्षा हुई लेकिन आगे बारिश का अभाव महसूस हो सकता है।
असली समस्या दक्षिण भारत की है। वहां तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं केरल जैसे राज्यों में मानसून की पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है और निकट भविष्य में भरपूर बारिश होने की उम्मीद भी नहीं है। इन प्रांतों में धान, कपास, मक्का, गन्ना एवं दलहन-तिलहन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। वर्षा की कमी से वहां विभिन्न खरीफ फसलों की औसत उपज दर, पैदावार एवं क्वालिटी पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। कम बारिश होने से बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर भी ज्यादा ऊंचा नहीं हो सका इसलिए सिंचाई में समस्या बरकरार रहेगी।
गत वर्ष की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर धान, मोटे अनाज, तिलहन, कपास एवं गन्ना के उत्पादन क्षेत्र में कमी आई है लेकिन दलहनों के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है। इसमें उड़द एवं तुवर का विशेष योगदान है। दूसरी ओर धान का क्षेत्रफल 16.37 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का रकबा 3 लाख हेक्टेयर घट गया है। अगर सितम्बर के शेष दिनों में मौसम एवं मानसून की हालत अनुकूल रही तो ज्यादा चिंता की बात नहीं होगी अन्यथा खरीफ फसलों का उत्पादन घट सकता है।
