गुजरात में छह वर्षों के अंदर दलहनों के उत्पादन में दोगुनी बढ़ोत्तरी
07-Jan-2026 04:30 PM
गांधीनगर। हाल के वर्षों में गुजरात देश के एक महत्वपूर्ण दलहन उत्पादक राज्य के रूप में उभरकर सामने आया है और दलहनों में आत्मनिर्भरता ने केन्द्र सरकार के मिशन में अच्छा योगदान दे रहा है।
सिंचाई की बेहतर सुविधा, ऊंचे स्तर के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तथा अच्छी क्वालिटी के बीज की उपलब्धता जैसे कारकों के अलर्ट गुजरात में दलहनों का वार्षिक उत्पादन बढ़कर अब 20 लाख टन से ऊपर पहुंच गया है जो 2019-20 सीजन के उत्पादन की तुलना में करीब दोगुना ज्यादा है।
राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच गुजरात में दलहन फसलों का कुल बिजाई क्षेत्र 9 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 14.40 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसी अवधि में दलहन फसलों की औसत उपज दर भी 1173 किलो प्रति हेक्टेयर से उछलकर 1495 किलो हेक्टेयर हो गई।
इससे साफ संकेत मिलता है कि राज्य में खेती की विधि में काफी सुधार आया है और फसल प्रबंधन पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है। इन मजबूत एवं ठोस आधार के सहारे राज्य में दलहनों का कुल वार्षिक उत्पादन 2019-20 के 10.58 लाख टन से उछलकर 2024-25 के सीजन में 21.52 लाख टन पर पहुंच गया।
गुजरात में चना, तुवर, उड़द एवं मूंग जैसी दलहन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जानी है। इसमें चना सबसे प्रमुख है। राज्य के दलहनों के कुल उत्पादन में चना का योगदान 70 प्रतिशत से भी अधिक रहता है। पिछले छह वर्षों के दौरान राज्य में चना का उत्पादन 6.36 लाख टन से उछलकर 15.63 लाख टन पर पहुंच गया।
इसके अलावा वहां अरहर (तुवर) के बिजाई क्षेत्र तथा उत्पादन में भी अच्छी वृद्धि हुई। 2019-20 के सीजन में वहां 2.10 लाख टन तुवर का उत्पादन हुआ था जो 2024-25 के सीजन में 45 प्रतिशत बढ़कर 3.08 लाख टन पर पहुंच गया।
इसके अलावा गुजरात में उड़द, मूंग एवं मोठ की पैदावार में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। 2024-25 के सीजन में वहां उड़द का बिजाई क्षेत्र 1.24 लाख हेक्टेयर तथा उत्पादन करीब 90 हजार टन दर्ज किया गया
इसी तरह मूंग का क्षेत्रफल 1.38 लाख हेक्टेयर तथा उत्पादन 1.26 लाख टन पर पहुंचा। मोठ सहित अन्य दलहनों की खेती 72 हजार हेक्टेयर में हुई थी और इसकी पैदावार 64 हजार टन आंकी गई।
