गन्ना की क्रशिंग में देर होने से चीनी का उत्पादन 44 प्रतिशत पीछे

16-Nov-2024 12:18 PM

नई दिल्ली । चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती छह हफ्तों में चीनी का घरेलू उत्पादन 7.10 लाख टन तक ही पहुंच सका जो पिछले सीजन की समान अवधि के उत्पादन 12.70 लाख टन से 5.60 लाख टन या करीब 44 प्रतिशत कम है। नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्टरी के अनुसार इस अवधि के दौरान कुछ ही चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग आरंभ हो सकी।  

फेडरेशन के मुताबिक इस वर्ष 15 नवम्बर तक राष्ट्रीय स्तर पर केवल 144 चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग हुई जबकि पिछले साल इसकी संख्या 264 पर पहुंच गई थी। शीर्ष उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र में गन्ना की क्रशिंग आरंभ नहीं हुई।

वहां 15 नवम्बर से इसकी अनुमति दी गई है। गत वर्ष इस राज्य में मध्य नवम्बर तक 103 चीनी मिलें क्रियाशील हो गई थी। गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर 7.82 प्रतिशत दर्ज की गई जो पिछले साल के बराबर ही है। 

कर्नाटक में केवल 40 तथा उत्तर प्रदेश में 85 चीनी मिलें इस अवधि में क्रियाशील हुई और वहां भी गन्ना की क्रशिंग की गति धीमी रही। हरियाणा में 15 नवम्बर से गन्ना की क्रशिंग आरंभ हुई।

आगामी समय में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश एवं उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में गन्ना की जोरदार क्रशिंग होने पर चीनी के उत्पादन में नियमित रूप से बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। 

फेडरेशन ने 2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान चीनी का उत्पादन घटकर 280 लाख टन पर सिमटने का अनुमान लगाया है जो 2023-24 सीजन के उत्पादन 319 लाख टन से 39 लाख टन कम है। गन्ना की पैदावार में भी भारी गिरावट आने की आशंका है।