ग्वाटेमाला में फसल कमजोर होने से भारतीय इलायची का निर्यात बढ़ने के आसार
25-Dec-2025 05:35 PM
कोच्चि। उत्तरी अमरीका महाद्वीप के मध्यवर्ती भाग में अवस्थित ग्वाटेमाला को दुनिया में छोटी (हरी) इलायची का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश माना जाता है जबकि भारत दूसरे नम्बर पर रहता है।
छोटी इलायची के वैश्विक निर्यात बाजार में भारत को ग्वाटेमाला की कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है इसलिए जब वहां प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होने के कारण उत्पादन में गिरावट आती है तब भारत से इलायची के निर्यात में वृद्धि की संभावना बढ़ सकती है। इस बार ऐसी ही हालत देखी जा रही है।
भारत से इलायची का अधिकांश निर्यात खाड़ी क्षेत्र के मुस्लिम बहुल देशों में होता है और वहां रमजान सीजन के दौरान इसकी मांग एवं खपत काफी बढ़ जाती है। इस बार वहां ग्वाटेमाला की सक्रियता घटने की संभावना है
जिससे भारतीय निर्यातकों को निर्यात बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल सकता है। उद्योग समीक्षकों के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान अगर भारत से इलायची का सकल निर्यात उछलकर 12-14 हजार टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी।
इडुक्की (केरल) के एक प्रमुख बागान मालिक के अनुसार ग्वाटेमाला में छोटी इलायची का उत्पादन इस बार 17 हजार टन के आसपास होने की संभावना है
जबकि सामान्य सीजन के दौरान वहां उत्पादन 40-50 हजार टन तक पहुंच जाता है। पिछले साल वहां भयंकर सूखा पड़ने से इलायची के नए बागान नहीं लगाए जा सके जिससे अगले साल का उत्पादन भी 22-23 हजार टन पर सिमट सकता है।
इधर भारत के सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य- केरल के इडुक्की जिले में छोटी इलायची की जोरदार तुड़ाई-तैयारी हो रही है और कमोबेश मार्च 2026 तक इसका सिलसिला जारी रहेगा।
चालू कैलेंडर वर्ष (2025) के दौरान विभिन्न नीलामी केन्द्रों में इलायची की कुल आवक बढ़कर 30-31 हजार टन पर पहुंचने के संकेत मिल रहे हैं जबकि इसका औसत नीलामी मूल्य 2520 रुपए प्रति किलो बताया जा रहा है।
