हरियाणा में कपास का भाव एमएसपी से नीचे होने से किसान चिंतित

13-Oct-2025 11:43 AM

हिसार। हरियाणा में कपास का थोक मंडी भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे आ गया है क्योंकि इसकी क्वालिटी कमजोर होने का बहाना करके उद्योग व्यापार क्षेत्र कम दाब पर इसकी खरीद का प्रयास कर रहा है।

सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) ने अभी तक मंडियों में अपनी गतिविधि आरंभ नहीं की है। किसानों के पास काफी कम दाम पर अपना उत्पाद बेचने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। 

उल्लेखनीय है कि पंजाब और राजस्थान की भांति हरियाणा के कुछ इलाकों में भी भारी वर्षा एवं बाढ़ से कपास की फसल को नुकसान हुआ।

किसानों को उम्मीद थी कि अच्छे दाम पर अपने उत्पाद की बिक्री करके कम से कम लागत खर्च प्राप्त करने में सफलता मिल जाएगी लेकिन मंडी भाव नीचे होने से उसकी यह उम्मीद भी समाप्त होती जा रही है। 

अधिकांश मंडियों में कपास का भाव 6000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है जो 7710 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे है।

बाढ़-वर्षा से फसल को हुई क्षति के कारण किसान पहले ही काफी निराश है और अब कमजोर बाजार मूल्य से उनकी परेशानी बढ़ गई है।

खरीदारों का कहना है कि मौजूदा समय में मंडियों में जो कपास पहुंच रही है उसकी क्वालिटी हल्की है और उसमें नमी का अंश मान्य या स्वीकृत स्तर से काफी ऊंचा है। 

केन्द्र सरकार ने 27 मि०मी० लम्बे रेशेवाली कपास का एमएसपी 7860 रुपए प्रति क्विंटल तथा 28 मि०मी० रेशेवाली उच्च क्वालिटी की कपास का समर्थन मूल्य 8910 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है मगर किसानों को इससे काफी नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। 

उधर सीसीआई के अधिकारियों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से कपास की खरीद शीघ्र ही शुरू की जाएगी। यह सही है कि हाल की वर्षा से कपास की क्वालिटी प्रभावित हुई है। उसमें नमी का अंश ज्यादा है।

खरीदी गई कपास की आपूर्ति जिनिंग मिलों को करने के लिए राज्य सरकार एवं मिलर्स से बातचीत की जा रही है। हरियाणा में इस बार करीब 3.80 लाख हेक्टेयर से कपास की खेती हुई है।