इस्मा के कांफ्रेंस में महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई चर्चा

08-Oct-2024 05:50 PM

नई दिल्ली। प्राइवेट चीनी मिलो की शीर्ष संख्या -इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) द्वारा गत 26-27 सितंबर को भारत सरकार तथा इंटरनेशनल शुगर ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर नई दिल्ली के लिए एयरोसिटी स्थित जो डब्ल्यू मैरियट में दो दिवसीय 'इण्डिया शुगर एंड बायो एनर्जी कांफ्रेंस' का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन केंद्रीय खाद्य मंत्री ने किया।  इस कांफ्रेंस की मुख्य विषय वस्तु (थीम) थी-"हॉर्मोनाइजिंग स्वीट सस्टैनेबिलिटी :नेविगेटिंग इंडियाज पाथ टू ए ग्रीन इकोनॉमी" अपने उद्घाटन भाषण में केंद्रीय खाद्य मंत्री ने इन उद्योगों में इनोवेशन के लिए सरकारी सहयोग - समर्थन की आवश्यकता पर जोर दिया। इस्मा के अध्यक्ष ने अपने आरम्भिक सम्बोधन में सभी आगुन्तक मेहमानो का जोरदार स्वागत किया। इस कांफ्रेस में केंद्रीय खाद्य सचिव और भारत में ब्राजील के राजदूत ने भी अपनी विचार व्यक्त किए । राजदूत महोदय ने भविष्य में विकास के लिए अंतराष्ट्रीय सहभागिता की जरूरत को रेखांकित किया। 

इस अवसर पर "इस्मा टाइम्स" की लॉन्चिंग की गई जिसका उद्देश्य चीनी एवं जैव ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित तमाम जानकारी एवं नवीनतम सुचना का प्रकाशन करके लोगो तक पहुंचाना है। 

इस्मा के अध्यक्ष ने अपने स्वागत भाषण में कहा है कि तमाम चुनौतियो एवं अड़चनों के बावजूद भारतीय चीनी उद्योग नियमित रूप से आगे बढ़ रहा है और नए-नए तरीको को अपना रहा है। पिछले कुछ दशकों के दौरान न केवल चीनी के घरेलू उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी हुई है बल्कि बायो एनर्जी के क्षेत्र में भी काफी सफलता मिली है इस उद्योग से देश के करीब 250 लाख लोगो की आजीविका सुनिश्चित हो रही है और लगभग 60 लाख लोग प्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग में रोजगार प्राप्त कर रहे है। गन्ना उत्पादकों को चीनी उद्योग से काफी राहत एवं आमदनी मिलती है। 

चीनी उद्योग का जितना अधिक विकास-विस्तार होगा, रोजगार क अवसर उतने ही बढ़ते जायेंगे और इससे देश को फायदा होगा। सरकार अब चीनी के साथ-साथ गन्ना से एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दे रही है जो हरित ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण श्रोत भी है।