जोरदार आयात और नई घरेलू फसल की आवक से तुवर के दाम पर भारी दबाव

26-Dec-2024 03:48 PM

मुम्बई । घरेलू प्रभाग में अरहर (तुवर) की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने तथा मांग सामान्य से कम होने के कारण कीमतों में नरमी का माहौल देखा जा रहा है।

महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में तुवर की नई फसल की आवक जोर पकड़ने लगी है जबकि विदेशों से भी तुवर का नियमित आयात हो रहा है।

चालू खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान इस महत्वपूर्ण दलहन का उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है। विभिन्न मंडियों में इसकी उपलब्धता बढ़ती जा रही है।

दो-तीन माह पूर्व तक तुवर का भाव 10,000 रुपए प्रति क्विंटल या इससे ऊपर चल रहा था जो अब क्रमिक रूप से घटते हुए  न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास आ गया है।

ज्ञात हो कि इस बार तुवर का एमएसपी बढ़ाकर 7550 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है। इसके सापेक्ष चेन्नई में लेमन तुवर का भाव 7350/7400 रुपए प्रति क्विंटल, मुम्बई में 7400/7500 रुपए प्रति क्विंटल तथा मोजाम्बिक से आयातित तुवर का दाम 6500 रुपए प्रति क्विंटल बताया जा रहा है।

उधर म्यांमार में तुवर का निर्यात ऑफर मूल्य महज एक सप्ताह के अंदर 960 डॉलर प्रति टन से घटकर अब 920 डॉलर प्रति टन पर आ गया है। वहां फसल की हालत अच्छी बताई जा रही है। 

आधकारिक ऑन लाइन पोर्टल के मुताबिक साबुत तुवर के दाम में गिरावट आने से इसकी दली दाल का अखिल भारतीय स्तर पर औसत खुदरा मूल्य भी एक माह पूर्व के 161.31 रुपए प्रति किलो से गिरकर 25 दिसम्बर को 156.44 रुपए प्रति किलो पर आ गया मगर यह गत वर्ष की समान अवधि में प्रचलित भाव 155.08 रुपए प्रति किलो से कुछ ऊंचा रहा। 

तुवर का भाव फिलहाल मध्य प्रदेश की पिपरिया मंडी में 6000/8000 रुपए प्रति क्विंटल, महाराष्ट्र की अकोला मंडी में विदर्भ लाल मारुति का दाम 7900/7950 रुपए प्रति क्विंटल तथा लातूर में पिंक तुवर का मूल्य 7900/7910 रुपए प्रति क्विंटल चल  रहा है जो एमएसपी से कुछ ऊपर है। 

चालू वित्त वर्ष के शुरूआती आठ महीनों में यानी अप्रैल से नवम्बर 2024 के दौरान देश में तुवर का आयात उछलकर 9.96 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है जो पिछले साल की इसी अवधि के आयात 5.45 लाख टन से काफी अधिक है।

फरवरी से म्यांमार में तुवर की नई फसल आने लगेगी जिससे भारत में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति और भी सुगम हो जाएगी। जनवरी में नई घरेलू फसल की आपूर्ति भी जोर पकड़ने लगेगी।

केन्द्र सरकार ने कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं हरियाणा में कुल 9.66 लाख टन तुवर खरीदने की स्वीकृति  दी है मगर महाराष्ट्र पर कोई निर्णय नहीं लिया है। तमाम परिस्थितियों को देखते हुए ऊंचे दाम पर तुवर की खरीद से बचने का सुझाव दिया जा रहा है।