ज्वार की बिजाई घटने से मोटे अनाजों के रकबे में ज्यादा वृद्धि नहीं

30-Dec-2025 08:34 PM

नई दिल्ली। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष मक्का, जौ तथा रागी के रकबे में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन ज्वार के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट आने के कारण मोटे अनाजों के कुल उत्पादन क्षेत्र में मामूली इजाफा ही संभव हो सका यह रकबा भी सामान्य औसत क्षेत्रफल से काफी पीछे है। बिजाई की गति काफी धीमी पड़ चुकी है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि श्री अन्न एवं मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र इस वर्ष 26 दिसम्बर तक 49 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका

जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 48.89 लाख हेक्टेयर से महज 11 हजार हेक्टेयर ज्यादा और सामान्य (पंचवर्षीय) औसत क्षेत्रफल 55.33 लाख हेक्टेयर से 6.33 लाख हेक्टेयर कम है।

2024-25 के सम्पूर्ण रबी सीजन के दौरान मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र 59.05 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा था जिसके मुकाबले चालू सीजन का मौजूदा बिजाई क्षेत्र लगभग 10 लाख हेक्टेयर पीछे चल रहा है। बिजाई की सुस्त गति को देखते हुए इस विशाल अंतर को पाटना आसान नहीं होगा। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले चालू रबी सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर ज्वार का उत्पादन क्षेत्र 22 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 20.38 लाख हेक्टेयर पर अटक गया और बाजरा का बिजाई क्षेत्र 11-12 हजार हेक्टेयर पुराने स्तर पर ही स्थिर रहा।

दूसरी ओर समीक्षाधीन अवधि में रागी का रकबा 49 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 69 हजार हेक्टेयर, जौ का बिजाई क्षेत्र 6.08 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.78 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का उत्पादन क्षेत्र 20.12 लाख हेक्टेयर से उछलकर 20.92 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। स्टॉक मिलेट्स की खेती सीमित क्षेत्रफल में हुई है। 

दरअसल इस बार प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों और महाराष्ट्र तथा गुजरात में किसानों द्वारा ज्वार के बजाए अन्य रबी फसलों की बिजाई पर विशेष जोर दिया गया क्योंकि उससे उन्हें बेहतर आमदनी प्राप्त होने की उम्मीद है। मक्का की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद इसकी खेती के प्रति किसानों में उत्साह एवं आकर्षण बरकरार है।