काकीनाडा एवं विजाग पोर्ट की बैरिकेडिंग से चावल निर्यातक नाखुश

18-Jul-2025 12:36 PM

विजयवाड़ा। हालांकि आंध्र प्रदेश सरकार कथित रूप से पीडीएस के चावल के निर्यात को रोकने के लिए काकीनाडा एवं विशाखापट्नम (विजाग) बंदरगाह की बैरिकेडिंग करके यहां आने वाले चावल से लदे वाहनों की गहन जांच-पड़ताल कर रही है लेकिन इससे अन्य राज्यों के निर्यातकों को न केवल परेशानी हो रही है बल्कि नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

एक अग्रणी कृषि विशेषज्ञ एवं कृभको एग्री के चीफ मैनेजर (बिजनेस डेवलपमेंट) राजेश जैन पहाड़िया का कहना है कि भारत संसार में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है और वैश्विक बाजार में 42-45 प्रतिशत की भागीदारी रखता है।

छत्तीसगढ़, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश से विशाल मात्रा में चावल का निर्यात या तो चेन्नई बंदरगाह से या फिर काकीनाडा एवं विजाग बंदरगाह से होता है। चावल का निर्यात कारोबार पारदर्शी तथा ऑनलाइन तरीके से होता है और इसमें कहीं कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। तमाम सम्बद्ध मंत्रियों एवं अधिकारियों से इस सम्बन्ध में बातचीत की गई है और उनसे बैरिकेडिंग को यथा संभव जल्दी से जल्दी हटाने का आग्रह किया गया है।

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने बैरिकेडिंग पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि आगामी अक्टूबर माह में भारत इंटरनेशनल राइस कांफ्रेंस का आयोजन होने जा रहा है जिसमें देश-दुनिया के करीब एक हजार प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

विदेशी प्रतिनिधियों को जब पता चलेगा कि भारत के दो सबसे प्रमुख चावल निर्यात बंदरगाह पर माल की निर्बाध पहुंच नहीं हो रही है तो उनमें गलत संदेश जाएगा।

भारत में चावल की कोई कमी नहीं है और यदि इसके अधिशेष स्टॉक का नियमित रूप से निर्यात शिपमेंट नहीं हुआ तो कई तरह की समस्या पैदा हो सकती है। छत्तीसगढ़ के एक अग्रणी चावल निर्यातक मुकेश जैन का कहना है

कि आंध्र प्रदेश सरकार को यदि पीडीएस के चावल का निर्यात होने का शक है तो अन्य बिंदुओं पर इसकी पैकिंग की जा सकती है मगर बंदरगाहों के बाहर बैरिकेडिंग करना नुकसानदायक साबित हो रहा है।

ऐसा प्रतीत होता है कि दो-चार स्थानीय निर्यातक इन बंदरगाहों से चावल के निर्यात कारोबार पर अधिपत्य ज़माने का प्रयास कर रहे हैं। प्रेम गर्ग के अनुसार पीडीएस का चावल अधिक से अधिक खुले बाजार में बिकने की संभावना है। इसका निर्यात नहीं हो रहा है।