कालीमिर्च के बढ़ते आयात पर अंकुश लगाने हेतु सरकार से आवश्यक कदम उठाने का आग्रह
19-May-2025 04:28 PM
कोच्चि। विदेशों और खासकर श्रीलंका तथा वियतनाम से कालीमिर्च के तेजी से बढ़ते आयात के कारण केरल और कर्नाटक के उत्पादक तथा व्यापारी बेहद चिंतित तथा परेशान हैं।
उन्होंने केन्द्र सरकार से इस पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल आवश्यक एहतियाती कदम उठाने का आग्रह किया है। उत्पादकों- व्यापारियों का कहना है कि द्विपक्षीय व्यापार संधि के तहत श्रीलंका से भारत में काली मिर्च के शुल्क मुक्त आयात की जो अनुमति दी गई है उस पर पुनर्विचार होना चाहिए और इस सम्बन्ध में श्रीलंका सरकार के साथ नए सिरे से बातचीत की जानी चाहिए।
इसके अलावा वैश्विक बाजार के परिदृश्य के आधार पर कालीमिर्च के लिए नया न्यूनतम आयात मूल्य (मिप) निर्धारित किया जाना चाहिए और आयात पर सरकार को गहरी नजर भी रखनी चाहिए।
चेन्नई के एक व्यवसायी का कहना है कि श्रीलंका और वियतनाम से विशाल मात्रा में सस्ती कालीमिर्च का आयात होने से घरेलू बाजार में इस महत्वपूर्ण मसाले के भाव घटकर नीचे आ गया है जिससे उत्पादकों एवं कारोबारी को आर्थिक रूप से नुकसान हो रहा है।
उनका कहना है कि श्रीलंका से आयातित कालीमिर्च का भारतीय बंदरगाहों पर खर्च 650 रुपए प्रति किलो बैठ रहा है जिसे रिटेल में 675 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है।
दूसरी ओर भारतीय गार्बल्ड श्रेणी की कालीमिर्च का दाम 700 रुपए प्रति किलो चल रहा है। पिछले तीन सप्ताहों के दौरान इसके मूल्य में 5 प्रतिशत की गिरावट आने के बावजूद मसाला उत्पाद निर्माता स्वदेशी माल की खरीद को नजरअंदाज करके विदेशी कालीमिर्च का उपयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं।
अन्य खरीदार भी फिलहाल कालीमिर्च की खरीद में विशेष दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि उन्हें आगामी समय में इसका भाव कुछ और गिरने की उम्मीद है। उत्पादक मंडियों में कारोबार सुस्त पड़ गया है।
श्रीलंका में अगले महीनों से कालीमिर्च की नई फसल की आपूर्ति शुरू होने वाली है जिससे आयात तेजी से बढ़ सकता है। भारत में 2500 टन तक श्रीलंकाई कालीमिर्च के आयात पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगता है
जबकि उससे अधिक मात्रा के आयात पर भी केवल 8 प्रतिशत का शुल्क वसूला जाता है। इस पर सरकार को नए सिरे से ध्यान देना पड़ेगा।
