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कमजोर मांग से दिल्ली चना में 75 रुपये की गिरावट, महंगे आयात से बड़ी मंदी पर अंकुश

13-Oct-2026 06:46 PM

कमजोर मांग से दिल्ली चना में 75 रुपये की गिरावट, महंगे आयात से बड़ी मंदी पर अंकुश

दाल मिलों की कमजोर लिवाली और चना दाल व बेसन में सीमित मांग के कारण आज दिल्ली चना बाजार में गिरावट दर्ज की गई। लॉरेंस रोड पर चना के भाव 75 रुपये प्रति क्विंटल घटकर मध्य प्रदेश लाइन के 7,475–7,500 रुपये और राजस्थान लाइन के 7,525–7,550 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

ऊंचे भावों पर दाल मिलर्स जरूरत के अनुसार ही खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार में तेजी का रुख कमजोर पड़ा है। हालांकि, व्यापारियों की बिकवाली भी सीमित है और आगामी त्योहारी सीजन में दाल व बेसन की मांग बढ़ने की उम्मीद से बाजार को कुछ समर्थन मिल सकता है।

सीमित स्टॉक और महंगे आयात से कीमतों को सहारा

घरेलू बाजार में दाल मिलों के पास चना का बकाया स्टॉक सीमित है। उत्पादक मंडियों में देसी चना की आवक भी अपेक्षाकृत कम है, जबकि प्रमुख बंदरगाहों पर आयातित माल की उपलब्धता सीमित बताई जा रही है। तंजानिया से धीमे आयात और ऑस्ट्रेलिया से ऊंची लागत पर चना मिलने के कारण विदेशी माल सस्ता पड़ने की संभावना कम है।

नवाशेवा बंदरगाह पर ऑस्ट्रेलियाई चना के अक्टूबर-नवंबर शिपमेंट के भाव 20 डॉलर प्रति टन बढ़कर 820 डॉलर प्रति टन, सीएंडएफ हो गए हैं। इससे आयात लागत बढ़ी है और घरेलू बाजार में कीमतों को समर्थन मिल सकता है।

कमजोर बुवाई पर भी बाजार की नजर

महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में नमी की कमी तथा सूखे की स्थिति से आगामी रबी चना फसल की बुवाई और उत्पादन को लेकर चिंता बनी हुई है। हालांकि, फसल पर वास्तविक असर का आकलन आगे के मौसम और बुवाई के आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा।

आगे का रुख: निकट अवधि में चना बाजार की दिशा दाल मिलों की खरीदारी, मंडियों की आवक और त्योहारी मांग पर निर्भर करेगी। कमजोर लिवाली से कीमतों पर दबाव रह सकता है, लेकिन सीमित स्टॉक और महंगे आयात बड़ी गिरावट को रोकने में मदद कर सकते हैं।