कनाडा से दो महीनों में मटर का शानदार निर्यात मगर भारत के प्रति अनिश्चितता कायम
19-Nov-2024 12:30 PM
वैंकुवर । हालांकि वर्तमान फसल वर्ष (मार्केटिंग सीजन) के शुरूआती दो महीनों में कनाडा से मटर का शानदार निर्यात हुआ और भारत 3,87,100 टन के आयात के साथ सबसे प्रमुख खरीदार बना रहा जबकि चीन 2,22,400 टन की खरीद के साथ दूसरे नम्बर पर रहा मगर अब निर्यात की गति धीमी पड़ने की संभावना है
क्योंकि भारत सरकार पीली मटर पर दोबारा आयात शुल्क लगाने पर विचार कर सकती है और वहां मटर की नई फसल के लिए जोरदार बिजाई भी आरंभ हो गई है।
कनाडियन ग्रेन कमीशन के आंकड़ों के अनुसार चालू मार्कटिंग सीजन के आरंभिक 14 सप्ताहों के दौरान कनाडा से मटर का बल्क निर्यात बढ़कर 11.20 लाख टन पर पहुंच गया जो गत वर्ष की समान अवधि के शिपमेंट 7.20 लाख टन से काफी अधिक रहा।
उल्लेखनीय है कि इस निर्यात मात्रा में कंटेनरों में होने वाला शिपमेंट नहीं है जबकि कुल निर्यात में उसकी भागीदारी 30 से 40 प्रतिशत तक रहती है। मटर के सम्पूर्ण निर्यात का आंकड़ा केवल 2 महीनों का ही उपलब्ध है।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक मटर के निर्यात की गति पिछले साल से ही नहीं बल्कि पंचवर्षीय औसत से भी तेज देखी जा रही है और समय गुजरने के साथ इसकी रफ्तार घटाने की जरूरत पड़ेगी अन्यथा अगले साल की दूसरी तिमाही में निर्यात के लिए बहुत कम स्टॉक बचेगा। तीसरी तथा चौथी तिमाही में भारी अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना है।
कनाडा के उत्पादकों एवं निर्यातकों की नजर भारत पर केन्द्रित है जहां पीली मटर के आयात को रोकने की कोशिश हो सकती है। फरवरी-मार्च से मटर मसूर के साथ-साथ चना के नए माल की आवक भी शुरू हो जाएगी और खरीफ कालीन दलहन फसलों-तुवर, उड़द तथा मूंग की भारी आपूर्ति भी होती रहेगी।
उस समय दलहनों के घरेलू बाजार भाव को स्थिर रखने के लिए सरकार विदेशों से आयात को सीमित रखने का प्रयास कर सकती है।
कनाडा से सीजन के शुरुआती महीनों में मटर का निर्यात तेज गति से होता है और फिर धीमा पड़ने लगता है। भारत की निर्यात नीति में होने वाला बदलाव कनाडा में मटर के बाजार पर गहरा असर डाल सकता है।
